मसूर ( Masoor , whole masoor )

मसूर ग्लॉसरी |स्वास्थ्य के लिए लाभ + मसूर की रेसिपी( Glossary & Recipes with Masoor in Hindi) Tarladalal.com Viewed 2683 times

अन्य नाम
काली मासूर, साबूत मसूर

वर्णन
भारत मे सबसे ज़्यादा प्रयोग होने वाली दाल मे मसूर एक है। बाज़ार मे मसूर के बहुत से विकल्प मिलते है, जिनका रंग पीले से लेकर लाल-नारंगी से हरा, भूरा और काला होता है।

यह विभिन्न प्रकार के मिलते है-साबूत और दाल रुप में, छिलके के साथ या बिना छिलके के। लाल, सफेद और पीले मसूर वह होते है जिनका छिलका निकाल दिया गया होता है। साबूत मसूर भूरे रंग का होता है। इसका प्रयोग उन सभी व्यंजन मे किया जा सकता है जिसमे समूर दाल का प्रयोग किया गया हो। लेकिन साबूत मसूर को मसूर दाल कि तुलना मे पकने मे ज़्यादा समय चाहिए।

उबला हुआ मसूर (boiled masoor)
जैसा इसका नाम है, मसूर को उबालकर उबला हुआ मसूर बनाया जाता है। आप प्रति 1 कप मसूर के लिये 2 कप पानी का प्रयोग कर सकते है और इसे ढककर पका लें। इस तरह से मसूर पकने मे कम समय लेता है, ऊर्जा कि मात्रा भी कम लगती है और खुला पकाने कि तुलना में ज़्यादा से ज़्यादा विटामीन बने रहते हैं। सबसे जल्दी पकाने का तरीका प्रैशर कुक करना है, जहाँ आप उबलते पानी ईच्छअअनुसार नमक डाल सकते है। मसूर और पानी के मिश्रण को उबालकर आँच धिमी कर लें। अगर यह बहुत गाढ़ा हो जाये तो पानी मिला लें। मसूर पकने पर फूल जाता है और पानी गाढ़ा हो जाता है। इस समय आप इसमे मसाले, सब्ज़ीयाँ या उबले चावल भी मिला सकते है और बेहतरीन व्यंजन बना सकते है। साबूत मसूर को खुला पकाने पर लगभग 30 मिनट लगते है और प्रैशर कुकर में 5-6 मिनट। पकाने के दौरान थोड़ा झाग बन सकता है, जिसे आसानी से निकाला जा सकता है।
आधा उबला मसूर (parboiled masoor)
यह पकाने की एक एैसी तकनीक है जिसमे भिगोये हुए मसूर को उबलते पानी मे आधा पकाया जाता है, और पुरी तरह पकने से पहले ही निकाल दिया जाता है। बहुत से व्यंजन मे आधे उबले मसूर का प्रयोग किया जाता है जिसे बाद मे व्यंजन अनुसार पुरा पकाया जाता है।
भिगोए हुए मसूर (soaked masoor)

चुनने का सुझाव
• साबूत मसूर अक्सर पहले से पैक या खुला भी मिलता है।
• पैकिंग के अलावा, मसूर कि अच्छी तरह जाँच कर यह देख लें कि उसमे किसी भी प्रकार के पत्थर आदि ना हो और दाने टुटे हुए ना हो।

रसोई मे उपयोग
• मसूर का प्रयोग मसूर दाल बनाने मे करें जो एक बेहतरीन भारतीय व्यंजन है।
• साबूत दाल को सब्ज़ीयों के साथ उबालकर गाढ़ा होने तक पकायें और मसालों का मिश्रण डालकर रोटी और चावल के साथ स्वादिष्ट व्यंजन बनायें।
• इसे चावल के साथ मिलाकर खिचड़ी बनयी जा सकती है।
• पके हुए मसूर को मसलकर अपने पसंद के हर्ब और मसाले के साथ मिलाकर खाने के साथ परोसें।
• खट्टा मसूर, लहसुनी मसूर, साल घोश्त या मसूर भरवां पराठे जैसे व्यंजन भी काफी मशहुर है।

संग्रह करने के तरीके
• साबूत मसूर को हवा बंद डब्बे मे डालकर ठंडी और सूखी जगह पर रखकर महिनो तक संग्रह किया जा सकता है।
• और भी लंबे समय तक संग्रह करने के लिये इसे फ्रिज मे रखें।

स्वास्थ्य विषयक
• हालाँकि साबूत मसूर के दाने छोटे होते है लेकिन यह दाल के परीवार का मुख्य भाग होता है और यह कलेस्ट्रॉल कम वाले रेशांक का अच्छा स्तोत्र है।
• यह कलेस्ट्रॉल कम करने मे मदद करता है और साथ ही रक्त मे शक्करा कि मात्रा कम रखने मे मदद करता है क्योंकि इसमे प्रस्तुत खाद्य रेशांक खाने के बाद बढ़ने वाली शक्कर कि मात्रा कम रखता है।
• कसूर मे उच्च मात्रा मे प्रोटीन होता है साथ ही ज़रुरी अमिनो एसिड जैसे आईसोल्यूसीन और लाईसीन, जो प्रोटीन प्रदान करने का किफायती स्तोत्र होते है और उनके लिये फायदेमंद होता है जो माँस का सेवन नही करते।
• साथ ही यह फलॅट, विटामीन बी1, पौटॅशियम्, लौह और अन्य मिनरल का अच्छअ स्तोत्र होता है और इसमे वसा कि मात्रा भी कम होती है।

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