हींग ( Asafoetida )

हींग ( Asafoetida ) Glossary |हींग स्वास्थ्य के लिए लाभ पोषण संबंधी जानकारी + हींग रेसिपी ( Asafoetida ) | Tarladalal.com Viewed 8002 times

अन्य नाम
पेरुंगयम

वर्णन
कहते हैं कि हींग का उत्पादन वास्तविक रुप से रोम में किया गया था, और भारत का मूल ना होने के बाद भी, इसका प्रयोग वर्षों से भारतीय दवाई और खाने में किया जा रहा है। यह एक राल है जिसका रंग ओचर होता है और इसका प्रयोग अकसर ज़्या पाउडर या दरदरे रुप में किया जाता है, जो अकसर पीले रंग के होते हैं। इसके राल को कसना मुश्किल होता है और पारंपरिक रुप से इसे खलबत्ते में पीसा जाता है। आजकल हींग अकसर मिले-जुले पाउडर के रुप में मिलता है, जिसमें 30% साल और 70% गम अरेबिक और चावल का आट या मैदा होता है।

भारतीय हींग कश्मीर से आता है जिसे अंतराष्ट्रिय बाज़ार में मूल्य माना जाता है।
कच्चे हींग की खुश्बू तेज़ हो सकती है, लेकिन पकाने के बाद इसकी खुश्बू बदल जाती है और खाने को नया रुप प्रदान करता है।

चुनने का सुझाव
• बाज़ार में इसके बहुत से विकल्प मिलते हैं, जो इसके उत्पादन की जगह, स्वाद और रंग के अनुसार अलग होते हैः हींग काबुली सूफैद (दूध जैसा सफेद हींग) और हींग लाल (लाल हींग)। अपने स्वाद अनुसार चुने।
• खरीदने से पहले उत्पादन और समापन के दिनांक को चुनें।
• आप डल्ला या पाउडर रुप में इसे खरीद सकते हैं।

रसोई में उपयोग
• इसका प्रयोग अकसर भारतीय पाकशैली में स्वाद प्रदान करने के लिए किया जाता है।
• इसे कम मात्रा में पाउडर के रुप में या पानी में घोल कर मिलाया जाता है।
• जैन और अन्य समुसाय जो पयाज़ और लहसुन का प्रयोग प्रतिबंधित करते हैं, वह इस विकल्प के रुप में हींग का प्रयोग करते हैं।
• दाल, करी, उपमा, रसम आदि में और भी सवाद और खुशबू डालने के लिए इससे तड़का लगायें। तेल की तुलना यह घी के साथ ज़्यादा स्वादिष्ट लगता है।
• पाउडर हीं को छाछ में मिलाकर कड़ी पत्ते का तड़का लगाऐं। यह पाचन तंत्र को मज़बूत करने में मदद करता है।

संग्रह करने के तरीके
• हींग को हवा बंद डब्बे में अच्छी तरह बंद कर रखें, कयोंकि इसकी तेज़ गंध आपके कपबोर्ड को भर सकती है।
• चूंकी इसकी खूशबु इसे खाली करने के बाद भी लंबे समय तक डब्बे में बनी रहती है, कोशिश कर एक या दो महीने के बाद उसी डब्बे का प्रयोग करें या उसे फेंक दें।

स्वास्थ्य विषयक
• हींग का प्रयोग पाचन तंत्र मज़बूत करने के लिए और गैस से बचने में भी मदद करता है।
• साथ ही इसका प्रयोग ब्रोन्काईटीस् और दमा की बिमारी में भी मदद करता है।

Categories

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