चना दाल ( Chana dal )

चना दाल ग्लॉसरी का उपयोग,स्वास्थ्य के लिए लाभ, रेसिपी, Chana Dal in Hindi Viewed 8628 times

वर्णन
चना दाल छोटे चने होते है जिन्हे आधा टोड़कर पौलिश किया जाता है। यह दिखने और स्वाद मे मकई के दाने जैसे होते है और यह भारतीय पाकशैली कि मशहुर सामग्री मे से एक है।
चना दाल स्वादिष्ट, पौष्टिक और पचाने मे आसान होती है। सूप, सलाद, करी, दाल आधारित व्यंजन, नमकीन व्यंजन, मीठे और चावल संबंधित व्यंजन मे प्रयोग होने के साथ-साथ, इन्हे भूनकर आटे मे भी पिसा जाता है (बेसन), जो एक औेर एैसी सामग्री है जिसका प्रयोग संपूर्ण भारत मे किया जाता है।

भूना हुआ चना दाल का पाउडर (roasted and powdered chana dal)
भिगोई और पकाई हुई चना दाल (soaked and cooked chana dal)
चना दाल को साफ कर किसी भी प्रकार कि धुल, पत्थर या कंकड़ निकाल लें। चना दाल को भिगोने के लिये, पहले दो से तीन बार पानी से धो लें और गुनगुने पानी मे भिगो दें। सारा पानी छानकर बर्तन भर पानी मे उबालकर पका लें या प्रैशर कुक कर लें।
भिगोई और आधी उबली हुई चना दाल (soaked and parboiled chana dal)
भिगोई हुई चना दाल (soaked chana dal)
चना दाल को साफ कर किसी भी प्रकार कि धुल, पत्थर या कंकड़ निकाल लें। चना दाल को भिगोने के लिये, पहले दो से तीन बार पानी से धो लें और गुनगुने पानी मे भिगो दें। भिगोने से चना दाल नरम हो जाती है औे पकने मे कम समय लेती है, जिससे समय और ऊर्जा बचते है। भिगोई हुई दाल का प्रयोग सलाद, करी या अन्य व्यंजन बनाने मे किया जा सकता है।

चुनने का सुझाव
• सूखी चना दाल साल में बाज़ार मे मिलती है और इसका संग्रहण आसान होता है।
• पैकेट वाली दाल खरीदने पर पैकेट कि सील और पैक करने कि दिनाँक जाँच लें। भरोसेमंद दुकान से ही खरीदें कयोंकि आप पैकेट खोलकर जाँच नही कर सकते है।
• थोक मे खरिदते समय इस बात का ध्यान रखें कि बिन मे रखी दाल खुली ना हो जिससे दाल मे धुल ल या किड़े लग सकते है।
• इस बात का ध्यान रखें कि दाल मे किसी भी प्रकार के धब्बे ना हो और दाल नमी, किड़े और कंकड़ से मुक्त हो।

रसोई मे उपयोग
• यह एक एैसी दाल है जिसका प्रयोग भारतीय रसोई मे अक्सर किया जाता है।
• इसकि खुशबु बेहतरीन होती है साथ ही लालजवाब स्वाद।
• चावल और रोटी के साथ परोसने पर, यह दाल संपूर्ण प्रोटीन के लिये ज़रुरी अमिनो एसिड प्रदान करती है।
• इस दाल को जल्दी पकाने के लिये इसे रातभर या कम से कम 2-3 घंटो के लिये भिगोना ज़रुरी होता है।
• अगर आपको कच्ची सब्ज़ीयाँ पसंद ना हो, तो उन्हे चना दाल के साथ पकाकर बनायें।
• चना दाल को दरदरा पीस कर ढ़िकला या हाँडवा बनाने मे प्रयोग करें जिससे उनको करारापन मिलता है और पौष्टिक्ता भी बढ़ती है।
• चना दाल को अक्सर सब्ज़ीयों के साथ स्ट्यू किया जाता है, खासतौर पर लौकी और स्क्वाश के साथ।
• पालक और लौकी के साथ चना दाल मशहुर मेल है।

संग्रह करने के तरीके
• सूखी चना दाल को साफ हवा बंद डब्बे मे रखकर गहरे रंग कि ठंडी जगह पर रखकर साल भर रखा जा सकता है।
• पकाने के बाद, दाल को फ्रिज मे एक दिन तक रखा जा सकता है। इसका जल्द से जल्द प्रयोग करना अच्छा होता है।

स्वास्थ्य विषयक
• चना दाल मे रेशांक कि मात्रा अधिक होती है और यह कलेस्ट्रॉल कम करने मे मदद करता है।
• इसका बेहतरीन स्वाद के साथ-साथ इसका ग्लाईसमिक इंडेक्स् भी कम होता है जो मधुमेह से पिड़ीत के लिये लाभदायक होता है।
• चना दाल ज़िन्क, फोलेट, कॅल्शियम् और प्रोटीन का अच्छा स्तोत्र है।
• इसमे वसा कि मात्रा कम होती है और अधिक्तर पौलीअनसैच्यूरेटड वसा होता है।

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