चवली ( Chawli )

चवली ग्लॉसरी |स्वास्थ्य के लिए लाभ, उपयोग, रेसिपी ( Chawli in Hindi) Viewed 6428 times

अन्य नाम
लोभिया

वर्णन
चवली सफेद रंग के मुलयाम बीज होते है जिनके अंदर के भाग मे काला दाग होता है। चवली कि उपरी परत काफी मोटी होती है। इसका स्वाद सौम्य, नटी और मलाईदार होता है।
यह चवली कि उपजती है जिसे उसके मध्यम खाने योग्य दानो के लिये उत्तपन्न किया जाता है जिसका स्वाद प्राकृतिक और जो मसालों के बिना भी स्वादिष्ट लगता है।

उबली हुई चवली (boiled chawli)
भिगोई हुई चवली (soaked chawli)
चवली को साफ कर किसी भी प्रकार के पत्थर या कंकड़ निकाल लें। चवली भिगोने के लिये, दो बार पानी से धोकर गुनगुने पानी मे भिगो दें। चवली भिगोने से इसके पकाने का समय कम हो जाता है जिससे ऊर्जा और समय, दोनो कि बचत होती है।

चुनने का सुझाव
• हमेशा बड़े, लबे दाने चुने जिनका रंग सफेद हो और उसके बीच मे काले रंग का दाग हो।
• इस बात का ध्यान रखें कि चवली पत्थर या कंकड़ और किड़ो से मुक्त हो।
• पके हुए बीन्स कॅन्ड रुप मे भी मिलते है।
• खरीदने से पहले उत्तपादन और समापन के दिनाँक कि जाँच कर लें।

रसोई मे उपयोग
• चवली का अंकुरित या पकाकर या आटे मे पीसकर प्रयोग किया जा सकता है।
• पकाने से पहले चवली को हमेशा पानी से धो लें औे पत्थर जैसे पदार्थ निकाल लें।
• पकाने से पहले चवली को 5-8 घंटे के लिये भिगो दें। पकाते समय, हर आधे घंटे मे पानी बदलते रहें।
• इसे बहुत ज़्यादा पकाकर दाल के रुप मे बनाया जा सकता है या केवल नरम होने तक पकाकर कटे हुए टमाटर, प्याज़ और नमक के साथ मिलाकर नाश्ता बनाया जा सकता है।
• चवली का स्वाद बढ़ाने के लिये इसमे नमक मिलाना ज़रुरी होता है। पहले से ही नमक मिलाने से चवली कच्चे रह जाते है, सलिये आधा पकने पर इसमे नमक मिलायें।
• चवली के पुरी तरह पकने के बाद, स्वादअनुसार मसाले मिलायें।
• चवली का प्रयोग कर बेहतरीन करी बनाई जा सकती है। एक पॅन मे तेल या घी गरम करें, कटी हुई प्याज़ और ज़ीरा डालें। प्याज़ के सुनहरे होने तक भून लें। अदरक, लहसुन, टमाटर और कटा हुआ पार्सली डालके मिलायें। 5 मिनट धिमी आँच मे पकाकर या तेल के अलग होने तक पकाने के बाद मसाले मिलायें। इस मिश्रण को चवली के साथ मिलायें। कटा हुआ धनिया, पार्सले या दही से सजाकर परोसें।
• यह सूप और सलाद मे बेहतरीन लगते है।

संग्रह करने के तरीके
• सूखी चवली को हमेशा हवा बंद डब्बे मे रखकर समान्य तापमान पर रखें।
• सूखी चवली को फ्रोज मे ना रखें।
• बीन्स् का प्रयोग साल भर के अंदर कर लेना चाहिए। लंबे समय तक तखने पर इनकी नमी खो जाती है औे इन्हे भिगने और पकने मे ज़्यादा समय लगता है।
• पकाने के बाद, चवली को ढ़ककर हवा बंद डब्बे मे बंद कर 5 दिनों तक रखा जा सकता है।
• कॅन्ड बीन्स् को खोलने पर उनका प्रयोग तुरंत कर लेना चाहिए। ज़रुरत हो तो बचे हुए बीन्स को फिज़र मे रखें। इसे खोले या बिना खोले 2 हफ्तों तक रखा जा सकता है।

स्वास्थ्य विषयक
• चवली बेहतरीन प्रकार के रेशांक-गुलने वाले खाद्य रेशांक का बेहतरीन स्तोत्र है, जो शरीर से कलेस्ट्रॉल कम करने मे मदद करता है।
• यह फोलेट, पौटॅशियम्, कॉपर, फोसफेरस और मॅन्गनीस का अच्छा स्तोत्र है।
• चवली उच्च गुणो वाला प्रोटीन प्रदान करते है, जो माँसाहारी प्रोटीन का अच्छा विकल्प है।
• दाल पौटॅशियम का बेहतरीन स्तोत्र होते है, जो स्वस्थ हृदय के लिये लाभदायक होता है, शरीर के सेल मे आहार तत्वों का आदान प्रदान संतुलित रखता है, पानी कि मात्रा संतुलित रखता है और रक्तचाप संतुलित रखने में मदद करता है।

कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स of पकाया चवली, Chawli

चवली का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 38 होता है, जो कम गिना जाता है। ग्लाइसेमिक इंडेक्स का मतलब आपके रोज़ के खाने में पाए जाने वाला कार्बोहाइड्रेट युक्त पदार्थ आपके रक्त शर्करा या ग्लूकोज़ के स्तर को कितनी तेज़ी से बढता है उसका क्रम होता है। 0 से 50 तक के खाद्य पदार्थ का ग्लाइसेमिक इंडेक्सकम होता है, 51 से 69 तक के खाद्य पदार्थ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स मध्यम होता है और 70 से 100 तक का ग्लाइसेमिक इंडेक्स उच्च माना जाता है। उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले पदार्थ वजन घटाने और मधुमेह के लिए उपयुक्त नहीं होते। चवली जैसे खाद्य पदार्थ जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है और यह धीरे–धीरे अवशोषित होते हैं, इसलिए यह पदार्थ रक्त शर्करा को तुरंत बढ़ने नहीं देते। ऐसे पदार्थ वजन घटाने के लिए और मधुमेह के लिए उपयुक्त होते हैं।

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