लौंग ( Cloves )

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वर्णन
लौंग ट्रॉपिकल झाड़ की कच्चे खुले हुए फूल के कलियां होती है। यह एक 12-16 मिमी वाली नोकीले शाख और 4 नोक वाला फूल होता है। इसलिए, यह माना जाता है कि लौंग नाम, लॅटीन शब्द क्लॅवस् से आता है जिसका मतलब कील होता है।
जब यह ताज़े होते हैं, इनका रंग गुलाबी होता है और सूखने के बाद इनका रंग जंग लगा भुरा हो जाता है। इनके स्वाद को मीठा, तेज़, तीखा और बेहद खुशबुदार बताया जा सकता है।

लौंग का पाउडर (cloves powder)
इसे लौंग को भुनकर पीसकर बनाया जा सकता है। इसे बनाने के लिए ब्लेन्डर का प्रयोग किया जा सकता है क्योंकि लौंग का पाउडर खलबत्ते में बनाना मुश्किल होता है। लौंग के पाउडर का प्रयोग मेरीनेड, स्ट्यू, सूप में किया जाता है।

चुनने का सुझाव
• लौंग को साबूत या पीसा हुआ खरीदा जा सकता है।
• बाज़ार में मिलने वाले पाउडर की तुलना में, साबूत लौंग ज़्यादा सुगंधित और स्वादिष्ट होते है।
• साबूत लौंग एकसमान और बिना किसी दाग के होने चाहिए।
• किसी भी अन्य सूखे मसाले की तरह, लौंग खरीदते समय, कोशिश कर जैविक रुप से उत्तपन्न हुई लौंग खरीदें कयोंकि यह मिलावटी लौंग से ज़्यादा स्वादिष्ट और सुगंधित होती है।

रसोई में उपयोग
• लौंग आसानी से व्यंजन का स्वाद बदल सकता है, खासतौर पीसा हुआ प्रयोग करते समय, इसलिए कम से कम मात्रा इसका प्रयोग करें।
• साबूत लौंग का प्रोयग अकसर सब्ज़ीयाँ, रोटी, समोसे, रोल, मिठाई को बाँधने के लिए कील की तरह किया जाता है।
• लौंग का प्रयोग विभिन्न मसाले के मिश्रण में किया जाता है, जैसे गरम मसाला, करी पाउडर, मलिंग मसाले और अचार के मसाले।
• साथ ही लौंग मशहुर वर्चेस्टायर सॉस का मुख्य सामग्री है।
• यह भारतीय पाकशैली में बेहद मशहुर हैं और इनका प्रयोग अकसर चावल से बने व्यंजन को खुशबु प्रदान करने के लिए किया जाता है।

संग्रह करने के तरीके
• साबूत लौंग खरीदना बेहतर होता है।
• अगर इन्हें हवा बंद डब्बे में रखकर सूर्य की किरणों से दुर रखा जाये, तो इन्हें लंबे समय तक रखा जा सकता है। फिर भी, इसमें अधिक मात्रा में तेल होने के कारण, लंबे समय तक रखने पर यह खराब हो जाते हैं। इसलिए समय-समय पर इसे छुकर और सूंघ कर इसके ताज़गी की जांच कर लें।
• पाउडर के रुप में इसका सवाद जल्दी खराब हो जाता है। लेकिन, चूंकी लौंग के पाउडर को खलबत्ते में नहीं बनाया जा सकता है और इसे पीसने के लिए मसाले ग्राईन्डर की आवश्यक्ता होती है, इन्हें एक बार में प्रयोग के लिए नहीं बनाया जा सकता है। इसलिए कोशिश कर कम से कम मात्रा में पीसकर हवा बंद डब्बे में रखें।

स्वास्थ्य विषयक
• भारतीय लंबे समय से लौंग का प्रयोग अपच, दस्त, हर्नीया और रींगवॉर्म के उपचार के लिए किया जा रहा है, साथ ही एथलीट्स् फुट और अन्य फफूंद इन्फेक्शन के लिए किया जाता है।
• भारत के पारंपरिक आयूर्वेदिक चिकित्सक, लौंग का प्रयोग प्राचीन काल से सांस संबंधित और पाचन सबंधित बिमारी के उपचार के लिए करते आ रहे हैं और इसके तेल का प्रयोग दांत के दर्द को ठीक करने के लिए किया जाता है।
• इसमें शक्तिशाली रोगाणु रोधक और सौम्य निश्चेतक गुण होते हैं।
• पानी के साथ उबालकर इससे गरागरे करने से, लौंग एक अच्छा कीटनाशक माउथवॉश बनाता है, जो सांस की गंध से राहत प्रदान करता है और गले की खराश को कम करने में मदद करता है।
• लौंग भूख बढ़ाने के लिए माने जाते हैं और इसलिए अपच से पीड़ीत लोगों को इसे खाने का सुझाव दिया जाता है?
• लौंग बहुत से चमड़ी रोग जैसे फूंसी, छाले आदि को साफ करने में मदद करते हैं।
• इनमें ऑक्सीकरण गुण होते हैं, जो इनमें प्रस्तुत युजीनोल के कारण होते हैं।
• लौंग खाना कामोत्तेजक माना जाता है।

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