हरी मूंग दाल ( Green moong dal )

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वर्णन
हरी मूंग दाल छोटी 1/4" कि गोल आकार कि दाल होती है जिसका रंग उपर से जैतूनी हरे रंग का और अंदर से पीला या हल्का सफेद होता है। इस दाल का स्वाद मीठा होने के साथ-साथ यह नरम और पचाने मे आसान होती है। हरा मूंग बहुत से विकल्प मे मिलता है जैसे संपूर्ण, दाल के रुप में और छिल्का निकाला हुआ (पिली मूंग दाल) और पिसा हुआ। हरी मूंग दाल वह दाल होती है जिसका छिलका निकाला ना गया हो। क्योंकि इसकी उपरी परत नही निकाली जाती है, इसलिये इसका हरा रंग बना रहता है।इसे दाल बनाने कि प्रक्रिया मिल मे होती है।

हरी मूंग दाल भारतीय पाकशैली कि पारंपरिक सामग्री है जिसका प्रयोग अक्सर करी मे किया जाता है। अन्य दाल कि तरह, हरी मूंग दाल मे वसा कि मात्रा कम होती है और इसमे प्रोटीन और रेशांक कि मात्रा अधिक होती है, साथ ही इसके प्रयोग का फायदा यह है कि यह पकने मे कम समय लगता है। इसके सौम्य मिट्टी जैसे स्वाद कि वजह से यह मसालों के साथ खूब जजता है।

भिगोई हुई हरी मूंग दाल (soaked green moong dal)
मूंग दाल को उपयुक्त पानी से साफ और धोकर कम से कम 1 घंटे के लिये भिगो दें औे व्यंजन अनुसार प्रयोग करें।

चुनने का सुझाव
• हरी मूंग दाल साफ और धुल, पत्थर और अन्य प्रकार के कंकड़ से मुक्त होना चाहिए।
• पैकिंग कि दिनाँक जाँच कर नई दाल चुनें।

रसोई मे उपयोग
• किसी भी प्रकार कि दाल कि तरह हरी मूंग दाल पकाई जा सकती है।
• इसे कटे हुए प्याज़, टमाटर, हरी मिर्च और अदरक-लहसुन के पेस्ट के साथ मिलाकर प्रैशर कुक किया जा सकता है और घी मे ज़ीरे का तड़का लगाकर मिलाया जा सकता है।
• दालों का आकर पकने के बाद बना नही रहता इसलिये इसका प्रयोग अक्सर सूप या प्यूरी मे किया जाता है।
• तमिल नाडू में पकि हुई मूंग दाल को गुढ़ और दूध के साथ मिलाकर इलायची के स्वाद से भरपूर खीर बनाई जाती है।
• हरी मूंग दाल को मिल या मिक्सर मे पीसकर सब्ज़ी के पकौड़े बनाये जा सकते है।
• इसे पानी मे भिगोकर दाल दोसा या उत्तपम का घोल बनाया जा सकता है।

चुनने का सुझाव
• हरी मूंग दाल को हवा बंद डब्बे मे रखें।

स्वास्थ्य विषयक
• अन्य दाल कि तरह हरी मूंग दाल प्रोटीन और खाद्य रेशांक का अच्छा स्तोत्र है।
• इसमे वसा कि मात्रा कम होती है और यह विटामीन बी कॉम्प्लेक्स विटामीन, कैल्शियम और पौटॅशियम से भरपूर होता है।
• अन्य दाल कि तुलना मे इसे खाने से गैस या अपच नही होता।
• पकी हुई हरी मूंग दाल पचाने मे आसान होती है इसलिये यह बच्चों, बड़े, बिमार और वृद्ध के लिये लाभदायक होती है।
• बिमारी से उठने पर हरी मूंग दाल का सूप बेगद लाभदायक होता है।
• बचपन, गर्भवस्था और स्तनपान करते समय इसका लगातार उपयोग ज़रुरत मात्रा मे पौषण प्रदान करने के साथ-साथ स्वस्थ रखने मे मदद करता है।
• अधिक मात्रा मे इसका प्रयोग करने पर यह विरेचक औषधी के रुप मे काम करता है।

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