सरसों ( Mustard seeds )

सरसों ग्लॉसरी |स्वास्थ्य के लिए लाभ + सरसों की रेसिपी( Glossary & Recipes with Mustard Seeds in Hindi) Tarladalal.com Viewed 8046 times

अन्य नाम
राई

वर्णन
छोटे-छोटे सरसों के बीज, जिन्हें अकसर तड़के में डाला जाता है, जो भारतीय खाने को मज़ेदार स्वाद, शानदार स्वाद और बेहतरीन खुशबु प्रदान करता है। सरसों के बीज सरसों के पेड़ से उत्पन्न होते हैं, जो क्रुसीफेरस पेड़ है जिसका संबंध ब्रॉकली, ब्रुसल स्प्राउट्स और पत्तागोभी से होता है।

जहाँ लगभग 40 विभिन्न प्रकार के सरसों के पेड़ होते हैं, तीन मुख्य प्रकार के सरसों का प्रयोग किया जाता हैः

सफेद सरसों (ब्रासिका अल्बा या ब्रासिका हिर्टा) गोल आकार के कड़े बीज होते हैं जिसका रंग मटमैला या पीला होता है। इसका स्वाद सौम्य होता है और इसमें प्रतिरक्षी गुण होते हैं, जो इसे बॉलपार्क मस्टर्ड और अचार बनाने के लिए पर्याप्त बनाता है।

काली सरसों (ब्रासिका निगरा) गोल आकार के कड़े बीज होते हैं जिनका रंग गहरे भुरे से लेकर काला होता है। यह छोटे होते हैं और सफेद विकल्प की तुलना में यह ज़्यादा तीखे होते हैं। इनका प्रयोग खाने को स्वाद प्रदान करने के लिए किया जाता है, जिन्हें अकसर तड़के में डाला जाता है या पाउडर के रुप में भी प्रयोग किया जाता है।

भुरी सरसों (ब्रासिका जुनसी) काली सरसों के समान होते हैं और इनका रंग हल्के से भुरे रंग का होता है। सफेद सरसों की तुलना में यह ज़्यादा तीखे होते हैं लेकिन काली सरसों के कम तीखे होते हैं, और इनका भी प्रयोग खाने में स्वाद प्रदान करने के लिए और तड़का लगाने में किया जाता है।

चुनने का सुझाव
• बहुत सी जगह अलग-अलग प्रकार की सरसों मिलती है, जैसे साबूत, पीसी हुई या पाउडर रुप में।
• साफ और बिना किसी कंकड़, धुल या पत्थर वाले बीज चुनें।
• पैकेट के सील और समापन के दिनांक की जांच कर लें।

रसोई में उपयोग
• तड़का खाने को स्वाद प्रदान कने का तरीका है, जिसमें तेल के गरम होने के बाद बीज और मसाले डाले जाते हैं। ऐसा करने से बीज और मसाले चटकने लगते हैं, जिससे इनका स्वाद उभर कर आता है। इस तड़के को खाने में मिलाया जाता है। ज़ीरा, हल्दी पाउडर, हींग आदि के साथ सरसों का प्रयोग अकसर उत्तर और दक्षिण भारतीय खाने मे किया जाता है।
• सरसों का तड़का लगभग हर दक्षिण भारतीय खाने में डाला जाता है, चाहे वह करी हो, चटनी, साम्भर या रसम।
• इन बीज को फूटने तक सूखा भुना जाता है और बाद में साबूत या पीसकर अचार में डाला जाता है। सरसों को भुनते समय, इस बात का ध्यान रखें कि आपने सरसों को बहुत ज़्यादा नहीं भुना है जिससे वह जल कर और कड़वे हो सकते हैं।
• अंतरष्ट्रिय पाकशैली में, साबूत सरसों का प्रयोग अचार बनाने में या पत्तागोभी या सॉरक्राट जैसी सब्ज़ीयों को उबालते समय तक किया जाता है।
• साथ ही इसका प्रयोग मेयोनीज़, विनग्रैट, मेरीनेड और बार्बेक्यू सॉस में भी किया जाता है।
• विनेगर और/या जैथून के तेल के साथ मिलाने पर, सरसों का प्रयोग सलाद ड्रेसिंग बनाने में भी किया जाता है।

संग्रह करने के तरीके
• इसके प्रतिजीवाणु गुणों के कारण, साबीत सरसों को फ्रिज में रखने कि ज़रुरत नहीं होती; इसमें फफूंद या हानिकारक किटाणु नहीं लगते।
• फिर भी, हवा बंद और साफ डब्बे, ठंडी और सूखी जगह पर ना रखने से यह बीज अपने तीखेपन को जल्दी खो देते हैं।
• ऐसी जगह पर रखने से, साबूत सरसों को लगभग एक साल तक रखा जा सकता है, वहीं पिसी हुई या सरसों के पाउडर को लगभग 6 महिने तक रखा जा सकता है।

स्वास्थ्य विषयक
• सरसों ना केवल मूंष में पानी लाने से भुख को 8 गुना बढ़ाता है, साथ ही इसमें पाचन, भुख बढ़ाने वाले, चिकित्सक और रक्त के बहाव को बढ़ाने वाले गुण होते हैं।
• ज़रुरत मात्रा में पाचन बढ़ाने के पदार्थ के रुप में, सरसों ज़हरीले पदार्थ को कम करने में मदद करता है और पेट दर्द से आराम पहूँचाता है। फिर भी, अत्यधिक मात्रा में यह हानिकारक हो सकता है। इसलिए बहुत से खाने में इसका प्रयोग तड़का लगाने के लिए किया जाता है, खास तौर पर जिन्हें पचाने में मुश्किल हो।
• साबूत सरसों ओमेगा-3 फॅटी एसिड का बहुत अच्छा स्रोत होता है, साथ ही, यह कॅल्शियम, खाद्य रेशांक, लौहतत्व, मैन्गनीस, नियासीन, फोसफोरस, प्रोटीन, सेलेनीयम और ज़िन्क के अच्छे स्रोत है।

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