जायफल ( Nutmeg )

जायफल ग्लॉसरी | जायफल की रेसिपी( Glossary & Recipes with Nutmeg in Hindi) Tarladalal.com Viewed 5473 times

वर्णन
जायफल या मीरीस्टिका फ्रेगरैन्स् एक सदाबहार वृक्ष है जो इन्डोनेशिया का मूल है। इस पेड़ के फल 2 अलग-अलग मसालों के स्रोत हैं- जायफल और जाविंत्री।
जायफल के बीज एक पीले रंग के खाने योग्य फल के अंदर होते हैं, जिसका आकार लगभग छोटे आडू जैसा होता है। यह फल दो भाग में कटकर, जाल जैसा, लाल रंग का आकार दर्शाता है जिसके अंदर बीज बँधा रहता है। इस बीजचोल को जमा कर, सूखाकर जाविंत्री के रुप में बेचा जाता है। इस बीजचोल के बीच में गहरे रंग का चमकीला मेवे जैसा आकार होता है और इसके अंदर अंडे के आकार का बीज होता है, जिसे जायफल कहते हैं।

जायफल को अकसर जाविंत्री या कड़े परत के बिना बेचा जाता है। यह अंडाकार और लगभग 1" लंबे होते, हल्के सिकुड़े हुए और बाहार से गहरे भुरे रंग और अंदर से हल्के भुरे रंग के होते हैं। जायफल और जाविंत्री का स्वाद लगभग समान होता है और समान गुण होते हैँ। जायफल थोड़ा ज़्यादा मीठा होता है ओर वहीं जाविंत्री का स्वाद सौम्य होता है। जाविंत्री को अकसर हल्के व्यंजन में डाला जाता है, जहाँ यह व्यंजन को नारंगी, केसर जैसा रंग प्रदान करता है और वहीं जायफल ज़रुरी तेज़ स्वाद प्रदान करता है, जैसे चीज़ सॉस में। जायफल को अकसर किसनी से कीसकर खाने में डाला जाता है।
अत्यधिक मात्रा में प्रयोग करने पर, जायफल द्रव्य पदार्थ के रुप में काम करता है और यह क़हरीला भी हो सकता है। इसलिए, हर बार में एक या दो चुटकी से ज़्यादा प्रयोग ना करें।

कसा हुआ जायफल (grated nutmeg)
व्यंजन मे डालने से पहले, जायफल को अकसर बारीक किसनी से कसा जाता है। कसे हुए जायफल का प्रयोग विबिन्न प्रकार के डेज़र्ट में किया जा सकता है, जैसे खीर, चीज़केक, फिरनी, पुरन पोली आदि। कभी-कभी चुटकी भर कसा हुआ जायफल नमकीन व्यंजन के स्वाद को भी उभार सकता है। साथ ही इसे घर पर बने गरम मसाला या चाय के मसाले में भी मिलाया जा सकता है। ताज़े जायफल को कसने पर, यह चीज़ सॉस के स्वाद को उभार देते हैं।
जायफल पाउडर (nutmeg powder)
इसे बनाने के लिए साबूत बीज को भुनकर, बारीक पाउडर में पीसा जा सकता है। ऐसा करने के लिए, मिक्सर या खल-बत्ते का प्रयोग किया जा सकता है। जायफल पाउडर का प्रयोग मेरीनेड, स्ट्यू और सूप में किया जाता है।

चुनने का सुझाव
• जायफल को साबूत या पीसा हुआ खरीदा जा सकता है।
• साबूत जायफल ज़्यादा खुशबुदार और स्वादभरा होता है, इसलिए साबूत खरीदकर, ज़रुरत अनुसार कसना या पीसना बेहतर होता है।
• साबूत जायफल समान और बिना किसी दाग के होना चाहिए।
• अन्य सूखे मसालों की तरह, जायफल खरीदते समय, कोशिश कर जैविक रुप से उगाया हुआ जायफल चुनें, जिससे आप सुनिश्चित रहेंगे कि यह बिना किसी मिलावट का है।

रसोई में उपयोग
• भारतीय पाकशैली में, जायफल का प्रयोग बहुत से मीठे और नमकीन व्यंजन में किया जाता है, खासतौर पर मुघलाई पाकशैली में।
• इसका प्रयोग कम से कम मात्रा में गरम मसाला में भी किया जा सकता है।
• अंतराष्ट्रिय व्यंजन में, जायफल को अकसर मीठे, तीखे व्यंजन जैसे पाई, पुडिंग, कस्टर्ड, कुकीस् और स्पाईस केक से संबोधित किया जाता है।
• यह बहुत से चीज़ के साथ बेहद अच्छी तरह जजता है और इसका प्रयोग सूफले और चीज़ सॉस में किया जाता है।
• सूप में यह टमाट। हरे मटर और काले बीन्स् के साथ बेहद अच्छी तरह जजता है। यह पत्तागोभी, पालक, ब्रॉकली, बीन्स्, प्याज़ और बैंगन के साथ अच्छी तरह जजता है।
• युरोपियन पाकशैली में, जायफल और जाविंत्री का प्रयोग खासतौर पर आलू से बने व्यंजन, सूप, सॉस और बेक किये हुए पदार्थ में किया जाता है।
• डच पाकशैली में, ब्रसल स्प्राउटस्, फूलगोभी और स्ट्रिंग बीन्स् जैसी सब्ज़ीयों मे इसे खासतौर पर डाला जाता है।
• जापनीस करी पाउडर में जायफल एक सामग्री होती है।
• जायफल से मिले ज़रुरी तेल का प्रयोग बेक्ड खाद्य पदार्थ, सिरप, पेय पदार्थ और मिठाई में प्राकृतिक रुप से स्वाद प्रदान करने के लिए किया जाता हे। इसका प्रयोग जायफल पाउडर कि जगह किया जाता है क्योंकि यह खाने में पदार्थ नहीं छोड़ता।

संग्रह करने के तरीके
• दोनो पीसे हुए जायफल और साबूत जायफल को धूप से दूर हवा बंद डब्बे में रखें।

स्वास्थ्य विषयक
• जायफल के तेल का प्रयोग, कुछ खाँसी के सिरप में मुख्य सामग्री के रुप में किया जाता है।
पारंपरिक दवा में, जायफल और जायफल के तेल का प्रयोग मस्तिष्क और पाचन संबंधित बिमारी ठीक करने के लिए किया जाता है।
• कम मात्रा में प्रयोग करने से, जायफल गैस, पाचन संबंधित बिमारी और भूख बढ़ाने के लिए और साथ ही दस्त, उल्टी और घबराहट से आराम प्रदान करता है।
• जायफल का स्वाद और इसकी खुशबु मिरिस्टिका से तेल से आती है, जिसमें मिरिस्टिकन होता है, जो एक ज़हरीला द्रव्य पदार्थ होता है। मिरिस्टिकन से भ्रम, उल्टी और मिरगी के दौरे पड़ सकते हैं और बहुत ज़्यादा मात्रा में निधन भी हो सकता है। हालंकि खाने में संतुलित मात्रा में प्रयोग करने से ऐसे असर नहीं होते।


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