मैदा ( Plain flour )

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वर्णन
मैदा नरम और सखत गेहूँ का मेल है। यह ब्लीच किया हुआ या बिना ब्लीच किया हुआ हो सकता है। प्राकृतिक तरीके से ब्लीच किया हुआ आटा पुराना होने पर बिना ब्लीच का आटा बन जाता है, वहीं रसायनिक रुप से ब्लीच किया हुआ आटा ब्लीच्ड आटे के नाम से जाना जाता है। बिना ब्लीच किये हुए आटे की तुलना में ब्लीच किये हुए आटे में प्रोटीन की मात्रा कम होती है, जिसका प्रयोग पाई क्रस्ट, कुकीस्, कविक ब्रेड, पॅनकेक एण्ड वॉफल बनाने के लिए किया जाता है। बिना ब्लीच किया हुआ आटे का प्रयोग खमीर ब्रेड, डॅनिश पेस्ट्री, पफ पेस्ट्री, स्ट्रुडेल, योर्कशायर पुडिंग, इकलेयर्स, क्रीम पफ और पोपओवरस् बनाने के लिए किया जाता है।

मैदा से बने खने को वजन के प्रति सचक इसे पौष्टिक नहीं मानते हैं और इसे जहाँ तक हो सके, संपूर्ण गेहूँ के आटे से बदलने की कोशिश करते हैं। लेकिन फिर भी, कुछ मिठाई, बेकरी पदार्थ, और ब्रेड में खासतौर पर मैदा का प्रयोग किया जाता है।

चुनने का सुझाव
• मैदा विभिन्न पैकेट के आकार में और अलग-अलग ब्रेन्ड का मिलता है। अपनी ज़रुरत अनुसार पैकेट का आकार चूनें।
• अच्छी तरह से पैक किया हुआ आटा खरीदें, जिसका रंग सफेद हो, मुलायम और दिखने में पाउडर जैसा हो। हल्के पीले रंग का आटा ना चुनें।
• कभी-कभी आटे में छना हुआ का नाम दिया गया होता है। इसका मतलब यह है कि आटे को पैक करने से पहले से ही पैक किया गया है लेकिन परिवहन के दौरान रह कौम्पैक्ट हो जाता है जिसकी वजह से यह छना हुआ नहीं बचता। इसलिए इसे दुबारा छानना ज़रुरी होता है।

रसोई मे उपयोग
• मैदा का प्रयोग अक्सर सफेद ब्रेड बनाने के लिए किया जाता है।
• भारत में, मैदा का प्रयोग पेस्ट्री और अन्य बेकरी पदार्थ जैसे ब्रेड, बिस्कुट, टोस्ट आदि बनाने के लिए किया जाता है।
• बेकिंग में इसका प्रयोग करते समय, मैदा खाने को एक रुप और स्वाद प्रदान करने में मदद करता है। यह सामग्री को बाँध कर रखता है और घोल को गाढ़ा बनाता है।
• मैदा का प्रयोग अक्सर तलने वाले खाने की कोटिंग के लिए किया जाता है, इससे कोट किये गए खाने में करारापन, स्वाद भरा क्रस्ट और अंदर के भाग को मुलायम और रसभरा बनाता है।
• इसका प्रयोग अन्य कार्य के लिए भी किया जाता है, सॉस को गाढ़ा बनाने से लेकर ब्रेड, केक, पिज़्ज़ा बेक करने और आटे से बने विभिन्न प्रकार के भारतीय और अंतरराष्ट्रिय मीठाई बनान तक किया जाता है।
• मैदा से बने आटे का प्रयोग भारतीय ब्रेड जैसे नान, पुरी, पराठा और चपाती बनाने के लिए किया जाता है।
• इसका प्रयोग सॉस को गाढ़ा बनाने में और क्रीम और पाई मिश्रण के लिए भी किया जाता है।
• मैदा का प्रयोग केक पॅन को डस्ट करने के लिए और घोल और ब्रेड के आटे को सतह से चिपकने से बचाता है।
• मैदा का प्रयोग फल और मेवे को घोल में डालने से डहले, उसपर परत लगाने के लिए भी किया जाता है, जिससे बह बेक करने पर घोल के नीचे बैठ नहीं जाते।

संग्रह करने के तरीके
• आटे को खाने के हवादार डब्बे में रखकर ठंडी, सूखी और गहरे रंग की जगह पर रखें। मैदा को हवा बंद डब्बे से ज़्यादा अच्छे से हवादार डब्बे में रखा जा सकता है।
• गरम नमी वाली जगह मैदा को खराब कर सकते हैं, क्योंकि ऐसा करने से आटा जम सकता है. साथ ही इसमें कीड़े लगने की आशंका होती है जो आटे को खराब कर सकते हैं। इसलिए इसे हमेशा सूखी जगह पर सूखे डब्बे में ही रखें।
• यह आटा आसानी से नमी और गंध सोख सकता है। इसलिए इस बात का ध्यान रखैं कि आप इस आटे से बने पदार्थ को प्याज़ और अन्य गंध वाले खाद्य पदार्थ से दूर रखें।
• अच्छी तरह से सग्रह करने से,इसे लगभग 8 महीने तक रखा जा सकता है। इसे और भी लबे समय तक रखने के लिए, आटे को अच्छी तरह बंद कर फ्रिज में रखें।
• किसी भी प्रकार की बदबू आने पर आटे को तुरंत फेंक दें।
• आटे में तेज़पत्ता डाल दें. कयोंकि तेज़पत्ता कीड़ों को प्राकृतिक तरीके से दूर रखने में मदद करता है।

स्वास्थ्य विषयक
• मैदा से बने खाद्य पदार्थ पौष्टिक नहीं होते और आजकल संपूर्ण गेहँ के आटे से बने पदार्थ को चुना जाता है।
• मैदा, पॉलिश चावल, सूजी आदि जैसे पदार्थ में छने हुए कार्बोहाईड्रेट होते हैं, जिनमें उच्च गलायसमिक इन्डेक्स होता है।

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