ओटस् ( Quick cooking rolled oats )

ओटस् क्या है, इसका उपयोग,स्वास्थ्य के लिए लाभ, रेसिपी , Rolled Oats in Hindi Viewed 14304 times

अन्य नाम
क्विक कुकिंग रोल्ड ओटस्

वर्णन
वैज्ञानिक रुप से अवेना सैटीवा के नाम से जानने वाला ओटस् एक कड़क अनाज है जो खराब मिट्टी मे भी उपजाऊ होता है जहाँ अन्य अनाज नही रह पाते। हालाँकि इसकि फसल कि कटाई बारीश मे होती है, लेकिन यह सालभर बाज़ार मे मिलता है। सुबह के नाश्ते मे सबसे ज़्यादा प्रयोग होने वाला, इसका प्रयोग चिभिन्न प्रकार के व्यंजन जैसे सलाद और डेज़र्ट मे भी किया जाता है जिससे व्यंजन मे पौष्टिक्ता बढ़ती है।

ओटस् का स्वाद भूनने कि वजह से मिलता है जो ओटस् कि छटाई करने के बाद साफ करने के बाद किया जाता है। हालाँकि इसके बाद दानो के छिल्के निकाल दिये जाते है, लेकिन इस प्रक्रीया से इसका ब्रैन और अंकुर बने रहते है। यह ओटस् को रेशांक और आहार तत्वों का बेहतरीन स्तोत्र बनाता है।

क्रश किए हुए ओटस् (crushed quick cooking rolled oats)
ओटस् का पाउडर (powdered oats)
भुना हुआ ओटस् का पाउडर (roasted and powdered oats)

चुनने का सुझाव
• ओटमील खरीदते समय, इस बात का ध्यान रखें कि पदार्थ मे किसी भी प्रकार का नमक, शक्कर या अन्य पदार्थ ना मिला हो।
• हेल्थ शॉप मे मिलाने वाले रोल्ड ओटस् और ओटमील को चुनेँ।
• एक बार मे थोड़ी मात्रा मे ओटस् खरीदें क्योंकि इसमे वसा कि मात्रा थोड़ी ज़्यादा होती है और यह जल्दी खराब हो जाते है।
• ओटस् अक्सर पहले से पैक या खुले थोक मे भी मिलते है।
• थोक मे खरीदे हुए किसी भी खाद्य पदार्थ कि तरह, ओटस् के लिये भी इस बात का ध्यान रखें कि जिस बर्तन मे यह रखा है, वह साफ और ढ़का हुआ है, कंकड़ से मुक्त है और वह दुकान भरोसेमंद हो जिसकी बिक्री ज़्यादा हो।
• चाहे आप ओटस् थोक मे खरीदें या पैकेट में, इस बात का ध्यान रखें कि ओटस् मे नमी ना हो।

रसोई मे उपयोग
• ओटस् को ओटमील और बारीक आटे के रुप मे प्रयोग किया जाता है।
• अपने दिन कि शुरुआत करने के लिये ओटस् का गरमा गरम कप बेहतरीन होता है। ओटस् के गरमा गरम कप में अपने मनपसंद मेवे और फल डालकर इसे स्वादिष्ट बनायें।
• ओटस् को कच्चा भी खाया जा सकता है और कच्चे ओटस् का प्रयोग कर बनाई गयी कुकीस् भी काफी मशहुर है।
• ओटमील अक्सर पॉरिज के रुप मे खाया जाता है, लेकिन इसका प्रयोग विभिन्न प्रकार के बेक्ड पदार्थ जैसे ओटकुकीस्, ओटकेक और ओटब्रैड बनाने मे किया जाता है।
• ओटस् का प्रयोग अक्सर ठंडे सिरीयल, खासतौर पर म्यूसली और ग्रनोला मे भी किया जाता है।
• विभिन्न प्रकार के ओटस् को पकाने के तरीके अलग होते है जिसका प्रयोग कर गरम सिरीयल या पॉरि बनाये जा सकते है। सभी प्रकार के ओटस् के लिये, बेहतर होता है कि ओटस् को पहले ठंडे पानी मे मिलाया जाये और फिर धिमी आँच पर पकाया जाये।
• ओटमील कुकीस् दोनो बच्चे और बड़ों के मनपसंद है।
• अगली बार ब्रैड या मफिन बनाने के लिये ओटस् का आटा या साबूत ओटस् मिलायें।
• अंकुरित करने से इसकि पौष्टिक्ता बड़ जाती है। इसलिये सेण्डविचस्, सलाद, स्टर फ्राय और सूप में अंकुरित ओटस् मिलायें।
• मिल मे आधा पकाने कि वजह से ओटस् को ताज़े फल, सुखे मेवे और दही के साथ आसानी से मिलाया जा सकता है।
• इसका प्रयोग कर किसी समय मे खाने का भाग बनाया जा सकता है-सुबह का नाश्ता, दोपहर का खाना या रात के खाने में।
• ओटस् एक बेहतरीन डेज़र्ट कि सामग्री बनाता है। इसमे शक्करा कि मात्रा कम होने के कारण, यह अन्य ऊर्जा भरपुर सामग्री कि जगह ले सकता है।
• विभिन्न प्रकार मे व्यंजन मे मिलाने के लिये ओटस् बहुउपयोगी और अधीन सामग्री है जिसे मिल मे ही थोड़ा पकाया जाता है। इसका प्रयोग झट-पट पास्ता, मफिन और क्रोसियेन्ट बनाने मे किया जा सकता है। साथ ही यह मैदा के एक पौष्टिक विकल्प माना जाता है।
• यह सूप और ग्रेवी को गाढ़ा बनाने मे मदद करता है जहाँ मैदा को इससे बदला जा सकता है और भारतीय व्यंजन मे मैदा कि जगह गेहूँ के आटे का प्रयोग किया जा सकता है।

संग्रह करने के तरीके
• ओटमील को हवा बंद डब्बे मे रखकर ठंडी, सूखी जगह पर रखकर लगभग दो महीनो तक रखा जा सकता है।
• फिर भी, समापन कि दिनाँक से पहले ही इसका प्रयोग करें।

स्वास्थ्य विषयक
• इसमे अधिक मात्रा मे रेशांक प्रस्तुत होने कि वजह से ओटस् पॉरिज पौष्टिक नाश्ता बनाता है।
• यह घुलने वाले रेशांक का अच्छा स्तोत्र है, जो रक्त मे एल.डी.एल कलेस्ट्रॉल कि मात्रा कम रखता है, जिसे बुरा कलेस्ट्रॉल कहा जाता है।
• ओटस् अत्यधिक वसा को सोखकर शरीर से बाहार निकालता है। इसलिये, यह कब्ज़ से बचने मे और पेट को स्वस्थ रखने मे मदद करता है।
• ओटस् से भरपुर आहार रक्त मे शक्करा कि मात्रा को संतुलित रखने मे मदद करता है, जो बिना ईन्सुलिन के मधुमेह से पीड़ीत के लिये लाभदायक होता है।
• महिलाओइ मे अण्डाशय और गार्भाशय संबंधित तकलीफ से आराम प्रदान करने मे मदद करता है।
• रजोनिवृत्ति के दौरान डिप्रैशन और मुड़ मे बदलाव से ओटस् आराम प्रदान करता है कयोंकि इसमे प्रोटीन और रेशांक प्रस्तुत होते है।
• ओटमील होरमोन प्रणाली मे नयापन लाने मे और यौन सुख को बढ़ावा देने मे मदद करता है कयोंकि यह नसों को प्रौढ़ रखता है।
• ओटस् मे अनोखे फॅटी एसिड और ऑक्सीकरण रोधी होते है, जो विटामीन ई के साथ सैल को पहुँचने वाले नुक्सान को कम करता है और कैंसर से बचाने मे मदद करता है।
• ओटस् मे बदसा कि मात्रा कम होती है और साथ ही लौह कि मात्रा बनी रहती है।
• कॅलशियम का बेहतरीन स्तोत्र होने के कारण, यह हड्डी और दाँत को मज़बुत रखने मे मदद करता है।
• विभिन्न प्रकार के शिशु के खाने मे ओटस् होता है, अक्सर आटे के रुप में। ओट फ्लेकस् भी बच्चे के लिये अच्छा होता है।


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