रागी का आटा ( Ragi flour )

रागी का आटा ( Ragi Flour in Hindi ) Glossary, रागी का आटा का उपयोग रेसिपी Viewed 61038 times

वर्णन
रागी एक वार्षिक पेड़ है जो अनाज के रुप में अफरिका और एशिया के जगहों पर भरपुर मात्रा में उगाया जाता है। भारत में, रागी मुख्य रुप से कर्नाटका, आंध्र प्रदेश, तमिल नाडू, महाराष्ट्र और गोवा में उगाया और प्रयोग किया जाता है। अनज के रुप में और छटाई के बाद भी रागी अच्छी तरह से रखा जा सकता है और इसमें जल्दी से कीड़े नहीं लगते। इससे इसे संग्रह करने के लिए रसायनिक कीटनाषक प्रयोग करने की आवश्यक्ता नहीं होती। यह प्रोटीन, लौह, कॅलशियम और रेशांक का एक किफायती स्रोत है, जो बहुत से जगहों में चुना जाता है। खसतौर पर यह अमिनोएसिड मिथीयोनाईन का बेहतरीन स्रोत है।

रागी के पुरे दाने को अअटे में पीसा जा सकता है या पीसने से पहले छाँटकर बारीक पदार्थ या आटे में बनाया जा सकता है, जिसका विभिन्न पारंपरिक खाने में प्रयोग किया जा सकता है। आटा बारीक या दरदरा पीसा जा सकता है, जो अलग-अलग ज़रुरत और व्यंजन की ज़रुरत पर निर्भर करता है।

चुनने का सुझाव
• रागी का आटा विभिन्न आकार के पेकेट में किराने की दुकानों में आसानी से मिलता है।
• रागी का आटा साफ, धूल से मुक्त और बिना किसी कीड़े या गंध के होना चाहिए।

रसोई में उपयोग
• रागी के आटे का प्रयोग अकसर चपाती या रोटी बनाने के लिए किया जाता है जिसे सब्ज़ीयों के साथ परोसा जाता है। यह ग्लूटेन के प्रति संबेदशील के लिए उपयुक्त है।
• रागी के आटे का प्रयोग पॉरिज बनाने के लिए किया जाता है। रागी के आटे को पानी में अच्छी तरह पकाया जाता है और छाछ और नमक या दुध और शक्कर डालकर मिलाया जाता है।
• रागी पॉरिज या गाढ़े पॉरिज को फल, सूखे मेवे के साथ मिलाकर पौष्टिक नाश्ता बनाया जा सकता है।
• रागी के आटे से स्वादिष्ट डोसे बनाये जा सकते हैं, जिसे नारीयल की चटनी, साम्भर आदि के साथ परोसा जा सकता है, या अपने आप में ही मक्ख़न या घी के साथ परोसा जा सकता है। आप इस रोटी में कटे हुए प्याज़, कसे हुए गाजर, हरी मिर्च, अदरक, धनिया आदि मिलाकर इसका स्वाद बढ़ा सकते हैं।
• रागी के आटे से फ्लेट ब्रेड, मोटे या पतले डोसे, पॅनकेक आदि भी बनाये जा सकते हैं।
• आप पके हुए रागी के आटे को दुध और शक्कर या गुड़ के साथ मिलाकर स्वादिष्ट खीर बना सकते हैं, जिसे आप इलायची पाउडर, बादाम के कतरन और काजू से सजा सकते हैं।
• माल्टड रागी से बने आटे को दुध या दही के साथ मिलाकर शक्कर या नमक के साथ खाया जा सकता है।
• कर्नाटक में, रागी का आटा अकसर रागी बॉलस् (रागी मूडल) के रुप में खाया जाता है। मुड्डे, जिन्हें रागी के आटे को पानी के साथ पकाकर आटा गूंथा जाता है और बॉल बनाकर ज़रुरत अनुसार आकार में बनाकर घी, रसम, साम्भर, दाल या अन्य खाने के साथ परोसा जा सकता है।
• महाराष्ट्र में, रागी के आटे का प्रयोग कर एक प्रकार का फ्लॅट ब्रेड, भाकरी बनाया जाता है।
• गोवा में, रागी के आटे से बना मशहुर सातवा, पोल (डोसा), भाकरी, अम्बील (एक खट्टा पॉरिज) आम है।

संग्रह करने के तरीके
• रागी के आटे को हवा बंद डब्बे में रखकर ठंडी और सूखी जगह पर रखें।

स्वास्थ्य विषयक
• रागी पौष्टिक्ता से भरा शानदार अनाज है।
• इसमें लगभग 6.7 प्रतिशत उच्च गुणों वाला प्रोटीन होता है।
• रागी मीथीयोनाईन से भरपुर होता है, जो अन्य अनाज में नहीं होता।
• रागी में भरपुर मात्रा में कॅलशियम भी होता है।
• इसका प्रयोग पारंपरिक रुप से शिशु के लिए खाने के रुप में किया जाता है। पॉरिज बनाने में आसान होता है और अगर आपका बच्चा इसे पचा सके तो, थोड़े पहले से भिगे हुए सूखे मेवे मिलाकर इसकी पौष्टिक्ता बढ़ाई जा सकती है।
• चूंकी रागी में ग्लूटेन नहीं होता, यह ग्लूटेन के प्रति संवेदशील के लिए एक बेहतरीन विकल्प है।
• कॅलशियम और रेशांक का एक बेहतरीन स्रोत, यह रक्त में कलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है; इससे प्लाक उत्तपादन कम होता है, रक्त वैसल को ब्लॉक होने से बचाता है और उच्च रक्तचाप और स्ट्रोक की आशंका कम करने में मदद करता है।
• यह वजन नियंत्रित रखने में और इसका ग्लाईसमिक इन्डेक्स कम होता है और इसलिए मधुमेह के लिए उपयुक्त होता है।
• आहार में उच्च रेशांक की मात्रा कुछ प्रकार के कैंसर होने की आशंका कम करता है, पाचन बढ़ाता है आदि।

Categories

  • विभिन्न व्यंजन



  • कोर्स

  • बच्चों का आहार



  • संपूर्ण स्वास्थ्य व्यंजन

  • झट - पट व्यंजन