राजगीरा का आटा ( Rajgira flour )

राजगीरा का आटा क्या है, इसका उपयोग,स्वास्थ्य के लिए लाभ, रेसिपी, in Hindi Viewed 28916 times

वर्णन
राजगीरा का आटा, राजगीरा के पेड़ के बीज से बनता है। राजगीरा परिवार के बहुत से भाग होते हैं, जिनमें से कुछ खास तौर पर बीज के लिए उगाये जाते हैं। देखअ गया तो, छोटे-छोटे बीज वानस्पतिक रुप से बीज नहीं लेकिन फल है।

हालाँकि बीज को बहुत से रुप से प्रयोग किया जाता है-ताज़े, सूखे, फूले हुए, फ्लेक्स् आदि, जहाँ सूखे बीज का आटा सबसे ज़्यादा प्रयोग किया जाता है। यह कृत्रिम अनाज का आटा ग्लूटेन मुक्त आहार के लिए, साथ ही उपवास के खने के लिए उपयुक्त है, कहाँ अनाज से बने खाना नहीं खाया जा सकता है।

राजगीरा के आटे का प्रयोग पास्ता और बेक किये हुए खाने बनाने के लिए किया जाता है। अन्य आटे के साथ, इसका प्रयोग खमीर वाले ब्रेड बनाने के लिए किया जाता है। राजगीरा के आटे के एक भाग को गेहूँ या अन्य आटे के साथ मिलाया जा सकता है। रोटी, पॅनकेक और पास्ता बनाने के लिए, 100 प्रतिशत शुद्ध राजगीरे के आटे का प्रयोग किया जा सकता है।
सूखे राजगीरा के बीज को, व्यंजन अनुसार, दरदरा या मुलयाम पीसा जा सकता है। रोटी और ब्रेड बनाने के लिए, आपको अकसर बारीक पीसे हुए आटे का प्रयोग करना पड़ेगा। राजगीरे के आटे को दरदरा भी पीसा जा सकता है, जो अपकी पसंद और व्यंजन पर निर्भर करेगा।

चुनने का सुझाव
• राजगीरा का आटा, साफ, धूल से मुक्त और बिना किसी कीड़े या बदबु के होना चाहिए।
• हो कसे तो, जैविक दाने या आटा को चुनना बेहतर होता है।

रसोई में उपयोग
• राजगीरा के आटे से अकसर चपाती, पराठे या रोटी बनाकर, सब्ज़ीयों के साथ परोसा जाता है।
• ग्लूटेन के प्रति संवेदशील राजगीरा चुनते हैं और इसे अकसर पकाकर पॉरिज बनाया जाता है और अन्य खने के साथ परोसा जा सकता है।
• राजगीरा के आटे से फ्लेटब्रेड के साथ मोटे खमीर वाले ड़ोसा और पतले बिना खमीर के पॅनकेक बाने के लिए किया जाता है।
• आप इससे चिक्की (मीठे बार) या फूले हुए राजगीरे से लड्डू भी बना सकते हैं।
• गोवा में, राजगीरा बेहद मशहुर है और इससे अकसर सातवा, पोल (ड़ोसा), भाकरी और अम्बील (खट्टा पॉरिज) बनोए जाते हैं।
• पुदिना के स्वाद वाले छाछ में राजगीरा और ओटस् एक पौष्टिक सुबाह का नाश्ता है।

संग्रह करने के तरीके
राजगीरा के आटे को हवा बंद डब्बे में रखकर ठंडी और सूखी जगह पर रखें।

स्वास्थ्य विषयक
• राजगीरा का आटा अकसर उपरी छिलके के साथ खाया जाता है, जिसमें बहुत से पौषण तत्व होते हैं।
• यह रेशांक और लौह से भरपुर होता है, जिसमें उच्च मात्रा में प्रोटीन होता है। यह इसे रोज़ के खाने के लिए उपयुक्त बनाता है।
• राजगीरा का आटा कॅलशियम और ऑक्सीकरण रोधी से भी भरपुर होता है।
• यह ग्लूटेन के प्रति संवेदशील के लिए उपयुक्त विकल्प है। 

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