इमली ( Tamarind )

इमली क्या है, इसका उपयोग,स्वास्थ्य के लिए लाभ, रेसिपी , Tamarind in Hindi Viewed 8365 times

अन्य नाम
पुली

वर्णन
बहुत से दक्षिण एशियाई पाकशैली के साथ-साथ भारतीय और थाई खाने में, अकसर इमली का प्रयोग मसाले के रुप में किया जाता है।

इमली पेड़ में नरम, गहरे भुरे रंग की फल्ली के रुप में पनपती है, जिसके अंदर काले रंग के बीज होते हैं। इसका नरम, चिपचिपा और खट्टा भाग होता है, जिसका प्रयोग खाने में किया जाता है। इसके बीज को फेंक सिया जाता है।

इमली दोनो मीठे और खट्टे रुप में मिलती है। खट्टे विकल्प का उपयोग भारतीय खाने में किया जाता है और वहीं थाई खाने में मीठे विकल्प का प्रयोग किया जाता है। इमली के बहुत से विकल्प छोटे होने पर बेहद खट्टे होते हैं। हालांकि यह फल पुराना होने पर मीठा हो जाता है, इसका मूल स्वाद अकसर खट्टा और एसिड जैसा होता है।

ताज़ी इमली (fresh tamarind)
ताज़ी इमली का स्वाद अनिखा खट्टा मीठा होता है, जिसे बहुत से लोग पसंद करते हैं। पेड़ से तोड़ी हुई इमली की उपरी परत सख्त होती है और इसके अंदर काले बड़े बीज के साथ नरम गुदा होता है। इसका प्रयोग करने के लिए, आपको पहले सख्त परत को तोड़कर खोल लें और लगभग 5 मिनट के लिए इसके गुदे को गरम पानी में भिगो दें। आँच से हठाकर, हल्का ठंडा कर लें। बाद में गुदे को मसलकर अपने हाथों से छन्नी से छान लें, जिससे इसके बीज को निकाल दिया जा सके। इसके गुदे से इमली कैन्डी, चटनी और पड थाई जैसे स्वादिष्ट थाई व्यंजन बनाए जा सकते हैं।
इमली का पानी (tamarind water)
इमली का पानी बनाने के लिए, इमली को गुनगुने पानी में लगभग 15 मिनट के लिए भिगो दें। जब वह नरम हो जाए, इमली को मसलकर सुदा अलग कर लें। बचे हुए गुदे में और पानी डालकर, गुदे को दुबारा मसलकर धो लें। अगर आपको अभी भी गुदा गाढ़ा लगे, आप थोड़ा और पानी डालकर दुबारा ज्यूस निकाल सकते हैं। सभी गुदे को मिलाकर, पानी मिलाकर पतला कर लें। इसे छानकर पानी अलग कर लें, जिसे हिन्दी में इमली का पानी या तमिल में पुली थन्नू कहते हैं। इस पानी का प्रयोग सांभर, चटनी, रसम आदि जैसे व्यंजन में किया जाता है।

चुनने का सुझाव
• इमली बाज़ार में सालभर छोटे और बड़े पैकॅट में मिलती है।
• पैकॅट को हल्का दबाकर इमली के नरम और ताज़गी की जाँच कर लें। अगर इमली बहुत ज़्यादा सख्त हो तो इसे भिगोने से आपको बहुत ज़्यादा गुदा नही मिलेगा।
• हमेशा पैकॅट के सील की जाँच कर लें।
• थोक से खरीदते समय, इस बात का ध्यान रखें कि बर्तन अच्छी तरह बंद हो और धूल या कंकड़ से मुक्त हो।
• नई इमली खाने को ज़्यादा अच्छा रंग प्रदान करती है, वहीं पुरानी इमली से खाने का रंग और भी गहरा हो जाता है। फिर भी, जिन्हें अम्लता हो, उन्हें पुरानी इमली का प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि यह पेट को कम हानी पहुँचाते हैं।

रसोई में उपयोग
• खट्टापन प्रदान करने के अलावा, इमली खाने को नरम बनाने में भी मदद करती है।
• इसका प्रयोग अकसर खट्टी चटनी और भूख बढ़ाने वाला पेय बनाने के लिए किया जाता है।
• इमली बहुत से भारतीय व्यंजन को खट्टापन प्रदान करती है, जैसे अचार और करी।
• दक्षिण भारतीय रसोई को इमली के बिना अधुरा माना जाता है! इसका प्रयोग मशहुर दक्षिण भारतीय व्यंजन जैसे सांभर, रसम और कुछ चटनी में भी किया जाता है।
• स्वादिष्ट सांभर बनाने के लिए, सब्ज़ीयों को पहले इमली के पानी उबाला जाता है और बाद में सांभर पाउडर और पकी हुई दाल मिलाई जाती है।
• रसम बनाने के लिए भी, टमाटर और हरी मिर्च को पहले इमली के पानी में पकाया जाता है और बाद में पकी हुई दाल और रसम पाउडर मिलाए जाते हैं।
• गुड़ और ज़ीरा के साथ बनी इमली की चटनी, समोसे और पकौड़ो के साथ अच्छी तरह जजती है।
• इमली वोस्टरसायर सॉस में भी प्रयोग होने वाली एक सामग्री है।
• थाई खाने में एक मुख्य खट्टापन प्रदान करने वाली सामग्री, इमली सूप, सलाद, स्टर-फ्राय और सॉस को फल जैसा खट्टापन प्रदान करती है।

संग्रह करने के तरीके
• अच्छी तरह पैक करने पर, इमली को कुछ हफ्तों के लिए सामान्य तापमान पर रखा जा सकता है।
• बेहतर होता है कि आप इसे काँच की बोतल या चिनी-मिट्टी के बर्तन में रखकर इसके ताज़े रंग को बनाए रखें।

स्वास्थ्य विषयक
• इमली विटामीन, रेशांक, पौटॅशियम, मैग्निशियम और अन्य ज़रुरी आहार तत्वों की अच्छी स्रोत है, जो अच्छे स्वास्थ के लिए ज़रुरी होते हैं।
• इमली ऑक्सीकरण रोधी का अच्छा स्रोत है, जो कैंसर से लड़ने में मदद करता है और साथ ही इसमें कॅरोटीन, विटामीन सी, फ्लेवोनोईड्स् और बी-विटामीन होते हैं।
• साथ ही यह थायामिन (रोज़ की ज़रुरी मात्रा का 36%), विटामीन ए, फोलिक एसिड, राईबोफ्लेविन और नायासिन से भरपुर होती है
• बहुत से यह विटामीन ऑक्सीकरण के रुप में और साथ ही शरीर के अंदर किणवण रस प्रक्रिया के लिए को-फॅक्टर के रुप में काम करते हैं।
• यह बूखार और सर्दी ठीक करने के लिए लाभदायक होते हैं।
• इमली के पानी से गरारे करने से गले में खराश से आराम मिलता है।
• इमली का प्रयोग पित्त रोग को ठीक करने के लिए किया जाता है।
• इमली कलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करती है और हृदय स्वास्थ रखने मे मदद करती है।
• विभिन्न चिकित्सक पदार्थों में, इस मसाले का प्रयोग सिरप, काढ़ा आदि में पायसी पदार्थ के रुप में किया जाता है।
• इमली का पल्प उल्टी, गैस, कब्ज़ और अपच के लिए लाभदायक उपाय है।
• इमली का पानी भूख बढ़ाने में मदद करता है। 

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