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 Last Updated : Feb 22,2020


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59 recipes

Traditional Indian Mithai - Read In English
પરંપરાગત ભારતીય મીઠાઈઓ રેસિપીઝ - ગુજરાતી માં વાંચો (Traditional Indian Mithai recipes in Gujarati)

ताज़े पनीर से बने मुलायम और नाज़ूक मालपुवे, जो आपके मूँह में जाते ही घुल जाऐंगे। यह व्यंजन काफी कुछ अजमेर के पास पुश्कर के मलाई मालपुवे जैसा है। इन्हें रबड़ी के साथ या केवल कटे हुए बादाम और पिस्ता से सजाकर गुनगुने तापमान पर परोसें। आपको छेना मालपुवे राजस्थान के केवल कुछ ही भाग में मिलेंगे। बस इन्हे ....
पारंपरिक मिठाईयों को घर पर बनाने के लिए केवल थोड़ी समझदारी की आवश्यक्ता है। उदाहरण के तौर पर, इस मलाई बर्फी को तैयार मावे से, घर पर आसानी से झटपट बनाया जा सकता है। जहाँ मिठाई को को बनाकर ठंडा करने में सारा दिन लगता है, आप रसोई में काम के समय को इस व्यंजन का पालन कर कम कर सकते हैं। इसलिए, इस मलाई बर् ....
नारीयल की मिठी रोटी एक मशहुर स्वादिष्ट व्यंजन पुरन पोली का एक विकल्प है, जिसे गेहूँ के आटे से बनाकर एक हल्का भरवां मिश्रण बनाया गया है। आटे में थोड़ा नमक मिलाने से यह भरवां मिश्रण की मीठास बढ़ाने में मदद करता है। आप इसमें अपनी पसंद अनुसार जायफल और शक्कर की मात्रा को कम या ज़्यादा कर सकते हैं।
खीर का एक मज़ेदार विकल्प, जहाँ दूध को गाढ़ा और स्वादिष्ट बनाने के लिए मीठी बूंदी कका प्रयोग किया गया है। यह ध्यान रखना ज़रुरी है कि बूंदी डालने से पहले दूध को पुरी तरह ठंडा किया जाए, जिससे बूंदी का आकार बना रहे। अगर आप बूँदी गरम या गुनगुने दूध मे डालेंगे, तो बूंदी ज़रुर फैल जाएगी और आपको बेसन के स्व ....
यह व्यंजन उदयपुर में काफी मशहुर है, जहाँ से इसका उप्पादन हुआ है। इसका रुप रबड़ी के समान है, हालांकि इसे गाढ़ा बनाने के लिए गेहूं के आटे का प्रयोग किया गया है। "खीच" का मतलब "मसला हुआ" होता है जो काफी कुछ पॉरिज जैसा दिखता है। चूंकी गेहूं और दूध ऊर्जा से भरपुर सामग्री है, इसे बिमारी से उभरने के लिए भी ....
बादाम से बनी कोई भी व्यंजन शानदार लगता है! इस व्यंजन में इलायची जैसे मसाले की मात्रा कम से कम रखें, जिससे बादाम का मलाईदार, मुलायम रुप और स्वाद बना रहे। दक्षिण भारतीय तरीके से बनी 'बादाम खीर' इलायची और जायफल के प्रयोग को कम रखती है और इनकी जगह इसमें चुटकी भर कपूर और केसर का प्रयोग किया गया है (जिसे ....
क्या आप किसी भी प्रकार के त्यौहार या शादी में पुरनपोली ना हो, ऐसा सोच सकते हैं? यह शानदार मिठाई सारे प्रदेश में मशहुर है, जिसे अलग-अलग नाम से संबोधित किया जाता है और विभिन्न तरह से बनाया जाता है। अगर किसी महीने कोई भी त्यौहार ना हो, तो लोग इसे बिना किसी कारण के रविवार के दिन खास व्यंजन के रुप में भी ....
झट-पट हल्वे को आधे घंटे के अंदर बनाया जा सकता है क्योंकि इसे आम सामग्रीयों के साथ बनाया गया है और इसे बनाने के लिए ज़्यादा तैयारीयाँ करने की आवश्यक्ता नहीं होती। दुध का मालईदार स्वाद आधार के रुप में काम करता है, जो केसर और इलायची के स्वाद को निहारता है। उपर डाले गए पिस्ता और बादाम इसे और भी बेहतर बन ....
एक बेहद स्वादिष्ट पायसम, जो बच्चों को बेहद पसंद आता है क्योंकि यह दिखने में नूडल जैसा दिखता है और खाने में सेंवई जैसा लगता है! इस व्यंजन को ज़रुर बनाकर देखें और चाहें तो इसमें और भी किशमिश और भुने हुए काजू डालें, क्योंकि यह पायसम को और भी स्वादिष्ट बनाते हैं।
जब मिठाई और मलाई को साथ मिलाया जाता है, आपको ग्लास भर एक मज़ेदार मीठा प्राप्त होता है! यह एक अनोखा लेकिन झटपट बनने वाला डेज़र्ट है, जहाँ मलाई कुल्फी के उपर जलेबी और फालुदा सेव डालकर उपर खुशबुदार गुलाब सिरप डाला जाता है। यह कुल्फी एण्ड जलेबी सन्डे देसी खाना पसंद करने वालो के लिए पर्याप्त है, जो मेहम ....
पारंपरिक चावल से बनी फिरनी में सीताफल के पल्प इस सीताफल फिरनी के स्वाद को यादगार बना देता है जो आपके मूँह में लंबे समय तक बना रहेगा। जैसे ही आपक इसके बाउल को खोलेगे, सीताफल की मीठी और सौम्य खुशबु सारे घर में फैल जाएगी और सबका मन इसकी ओर आकर्षित कर देगी!
श्रीखंड अब डायबिटिक्स की पहुँच से दूर नहीं रह गया है! यह स्वादिष्ट मिक्स्ड फ्रूट श्रीखंड लो फैट दही का उपयोग करके फैट को नियंत्रण में रखता है और शक्कर की जगह पर शुगर सबस्टिट्यूट का उपयोग करता है। पर्याप्त पोषक तत्व देने के अलावा फल इस डेजर्ट में फाइबर की मात्रा भी बढाते हैं। नाशपाती और सेब जैसे ....
त्यौहारों के समय सबसे पहले खाने में पाल पायसम की चर्चा की जाती है! पारंपरिक रुप से दूध को धिमी आँच पर लंबे समय तक उबालना चाहिए जिससे वह गाढ़ा हो जाये और स्वाद मलाईदार हो जाये। इसके अलावा, इसे झटपट बनाने के लिए आप कन्डेन्स्ड मिल्क का प्रयोघ भी कर सकते हैं।
जोधपुर अपने मावा कचौड़ी के लिए मधहुर है। सूखे मेवे और मावा (खोया) से भरी, करारी तली हुई कचौड़ी को चाश्नी से ढ़का गया है। इन कचौड़ीयों का मज़ा दिन के किसी भी समय लिया जा सकता है। इन मीटी कचौड़ी को अकसर "गुजीया" कहा जाता है और होली के पर्व में इन्हें "खास तौर" पर बनाया जाता है।

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