शक्कर ( Sugar )

शक्कर ग्लॉसरी | शक्कर की रेसिपी( Glossary & Recipes with Sugar, Chini, Sakhar in Hindi) Tarladalal.com Viewed 27061 times

अन्य नाम
चिनी

वर्णन
शक्कर एक कार्बोहाईड्रेट है जो खाने को मिठा बनाता है। हालाँकि आम सफेद शक्कर सुक्रोस होती है, अन्य शक्कर मे लॅक्टोस और फुक्टोस होता है, जो मीठा स्वाद प्रदान करते है।
शक्कर प्राथमिक रुप से चुकंदर और गन्ने से बनता है। यह मैपल के झाड़, ज्वार के पेड़ और कुछ प्रकार के ताड़ जैसे जंगली खजूर का पेड़ से भी बनाया जा सकता है। शहद को शक्कर का स्तोत्र माना जा सकता है।

इस मीठे पदार्थ मे बहुत से व्यंजन को रुप, स्वाद प्रदान करने के गुण होते है, खासतौर पर बेक्ड पदार्थ मे। शक्कर का रोज़ के खाने मे काफी प्रयोग किया जाता है और इस पदार्थ को लोग आम मानते है। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि एक ज़माने मे शक्कर काफी महँगा हुआ करता था और केवल सक्षम व्यक्ति ही इसे प्रयोग करते थे।

चुनने का सुझाव
• शक्कर भिन्न आकार के पैकेट मे मिलता है और छोटे या बड़े कण मे भी मिलता है। अपनी ज़रुरत अनुसार चुने।
• पैक करने कि दिनाँक जाँच कर यह देख ले कि शक्कर सूखा और नमी से मुक्त है। इसका आसानी से मिलना इसकि ताज़गी का प्रतिक माना जाता है।

रसोई मे उपयोग
• शक्कर पानी मे आसानी से घुलकर चाशनी बनाती है, जिसका फल का पल्प या आर्टिफीशियल एैसेन्स बनाने मे प्रयोग किया जाता है।
• शक्कर का प्रयोग कर कैन्डी बनतायी जाती है।
• सुबह कि चाय या कॉफी शक्कर ने बीना अधुरी होती है।
• टमॅटो कैचप मे स्वाद के अलावा, शक्कर उसका रंग भी लाल रखता है।
• खाने को बेक करते समय शक्कर मिलायी जाती है, जिससे खमीर अच्छी तरह बनता है और यह क्रस्ट को सुनहरा रंग प्रदान करता है।
• सॉफ्ट ड्रिंक मे एकाग्रिता मिलाता है।
• होटल मे कच्चे आलू को तलने से पहले शक्कर वाले मे भीगोया जाता है, जिससे आलू कारारे बनते है।
• मकई, गाजर और मटर का स्वाद बढ़ाने के लिये थोड़ी मात्रा मे शक्कर मिलायें।
• टमाटर आधारीय बार्बेक्यू, स्पैघटी और चिली सॉस कि खटाई को शक्कर से कम करें।
• नमकीन सॉस, सूप और ग्रैवी मे भी थोड़ी मात्रा मे शक्कर या भूरी शक्कर मिलायी जा सकती है।
• शक्कर को बेक्ड पदर्थ मे फॅट के साथ मिलाकर यह मिश्रण मे हज़ारो छोटे-छोटे पौकेट बनाते है जिनमे हवा बंद हो जाती है और खाने कि मुलायम और एपरी परत करारी बनाती है।
• फॅट आधारित केक मे शक्कर घिल को तरल से ठोस बनने के समय कम कर तापमान नियंत्रित रखता है, जिससे बेकिंग पाउडर जैसे खमीर लाने वाले पदार्थ को ज़्यादा से ज़्यादा मात्रा मे कार्बनडाईऑक्साईड उत्तपन्न करने का समय मिलता है। यह गैस मिश्रण के हवा पौकेट मे बंद हो जाते है और समान मुलयाम केक बनाने मे मदद करते है।
• फोम वाले केक, जैसे एन्जल और स्पोन्ज केक मे, शक्कर का फेंटने के लिये प्रयोग किया जाता है, जिससे फोल मुलायम और कल्का बनता है और केक को आकार प्रदान करता है।
• शक्कर को गरम करने से कैरेमल बनता है, जिसका रंग सफेद से पीला और बाद मे भूरा बन जाता है। इसका स्वाद और इसकि खुशबु लालजवाब होती है।
• शक्कर एक प्राकृतिक संग्रहण पदार्थ है, कयोंकि यह नमी सोख कर खाने मे अनचाहे किटाणु पनपने से रोकता है। इसलिये शक्कर से बने पदार्थ जैसे केण्डी, सिरप, आईसिंग, जैली, जैम और सॉस मे फफूंद आसानी से लग जाती है।
• शक्कर गुच्छा और डल्ला बनने से रोकती है। इसलिये सूखी सामग्री जैसे मसाले, स्टार्च और बेकिंग पाउडर को घोल मे डालने से पहले, इन्हें पहले शक्कर के साथ मिलायें।
• शक्कर का प्रयोग माईक्रोवेव खाने मे भी होने लगा है। असमानता से गरमाहट को फेलने से रोकने के साथ-साथ, शक्कर कि अनोखी डाईइलेक्ट्रिक गुण खाने मे मनचाहा करारापन और परत को सुनहरा बनाने मे मदद करती है।
• शक्कर बहुत आसानी से घुल जाती हैः गरम पानी के केवल एक पाईंट में पाँच पाऊन्ड शक्कर मिलाकर संतृप्त गोल तैयार किया जा सकता है। यह अनोखा गुण खाना बनाने वाले को शक्कर का प्रयोग कर विभिन्न प्रकार के पेय पदार्थ, बेहतरीन सिरप, क्रीमी फोन्डेन्ट और फज बनाने मे काम आता है।

संग्रह करने के तरीके
• हवा बंद डब्बे मे रखकर और ठंडी सूखी जगह पर सूर्य कि किरणो से दुर रखकर, शक्कर को लंबे सकय तक रखा जा सकता है।
• देखा गया तो शक्कर कभी खराब नही होती, लेकिन साल भर के अंदर शक्कर का प्रयोग कर लेना चाहिए क्योंकि लंबे समय तक उमस और नमी कि वजह से यह जम सकती है।

स्वास्थ्य विषयक
• शक्कर से हुई हानी बहुत ही धिमी और घातक होती है। आपके पाचक ग्रंधी, अधिवृक्क ग्रंधी और होरमोन प्रणाली को पुरी तरह खराब करने मे सालों लग जाते है।
• दाँतो कि सरण का मुख्य कारण शक्कर होता है, जैसे दाँतो मे गड्ढ़े होना, मसूड़े से खून निकलना, तेड़े मेड़े दाँत आना और दाँत गिरना।
• यह मधुमेह, हाईपरग्लाईसिमीया और सायपोग्लाईसिमीया होने का कारण है।
• यह हृदय रोग, आर्टीरियोस्क्लेरोसिस, दिमाँगी रोग, डिप्रैशन, वृद्धवास्था, उच्च रक्तचाप और कैंसर होने का दोनो महत्वपूर्ण और सहायक कारण है।
• इसका बहुत ही हानीकारक प्रभाव होरमोन प्रणाली पर पड़ता है, जहाँ इस प्रणाली को असंतुलित करता है साथ ही हुए ग्रंथि को भी हानी पहुँचाता है, जैसे अधिविकृक ग्रंथि, पाचक ग्रंथि और लीवर, जिसके कारण रक्त मे शक्करा कि मात्रा तेज़ी से बढ़ने लगती है। शरीर मे इसका और भी हानीकारक प्रभाव होते है, जैसे अत्यधिक थकान, बुलिमिनया से पिड़ित मे मीठे खाने कि अत्यधिक लालसा, पी.एम.एस का बढ़ना, लगभग 50% बच्चों मे अतिक्रियाशीलता, गबराहट और चीड़चीड़ापन, वजन कम करने मे तकलीफ होना, आदि।
• इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि शक्कर काफी खास्य पदार्थ मे पाया जाता है, अनस से लेकर कैचप और सूप में और हॉट-डॉग मे भी। इसलिये, शक्कर कि मात्रा संतुलित रखने का मतलब है, एैसे खाद्य पदार्थ भी संतुलिता मात्रा मे खाना।

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