काबुली चने ( Kabuli chana )

काबुली चने ग्लॉसरी | काबुली चने का उपयोग, रेसिपी ( Kabuli Chana in Hindi) Viewed 10619 times

वर्णन
काबुली चना सबसे पहले उत्तपन्न कि हुई दाल है। यह आकार मे छोटा, कड़क, भूरे रंग का बीन है जिसका गोल आकार एक सेन्टीमीटर से भी कम होता है। यह दिखने मे मुरझाया हुआ हेज़लनट जैसा दिखता है। इसका स्वाद नटी और मलाईदार होता है, कड़ा रुप और इसमे प्रसतुत कम वसा कि मात्रा इसे बेहतरीन खास्य पदार्थ बनाती है।देसी काबुली चने छोटे और कड़े होते है और इनका रंग पीला, हरा, हल्का भूरा या काला भी हो सकता है।

उबले हुए काबुली चने (boiled kabuli chana)
काबुली चने को रातभर पानी मे भिगो दें। यह अपने आकार से 2-3 गुना फूल जायेंगे। नमक मिलाकर तेज़ आँच पर 10 मोनट तक प्रैशर कुक करें। आँच धिमी कर 15 मिनट और पकायें। इसके अलावा, ढ़के हुए बर्तन मे भी आप इसे पका सकते है। पकने के बाद, आँच से हठा लें। ठंडा करने के बाद, ज़रुरत अनुसार प्रयोग करें। इसके पकने का समय पकाने के तरीके पर निर्भर करता है।
भिगोया हुआ और दरदरा क्रश किया हुआ काबुली चना (soaked and coarsely crushed kabuli chana)
धोकर काबुली चने को रातभर पानी मे भिगो दें। यह अपने आकार से 2-3 गुना फूल जायेंगे। सारा पानी छानकर एक और बार धोयें और भिगे हुए काबुली चनो को मिक्सर मे पीसकर दरदरा मिश्रण बना लें। इस मिश्रण का प्रयोग टिक्की, वॉफल, आदि बनाने मे करें।
भिगोया हुआ और आधे उबला हुआ काबुली चना (soaked and parboiled kabuli chana)
भिगोए हुए काबुली चने (soaked kabuli chana)
काबुली चने को रातभर पानी मे भिगो दें। यह अपने आकार से 2-3 गुना फूल जायेंगे। इसका प्रयोग सलाद, चाट, सब्ज़ी, पुलाव और अन्य प्रकार के मज़ेदार व्यंजन बनाने मे करें। अअप इसे और बी लंबे समय तक भिगो कर कुछ दिनों तह फ्रिज मे रखकर ज़रुरत अनुसार प्रयोग करें।
अंकुरित काबुली चने (sprouted kabuli chana)
काबुली चने को धोकर रात भर भरपुर पानी मे भिगो दें। पानी छानकर चने निकालकर रख दें। चपटे बाउल या सॉसर मे 100% गीला सूती का कपड़ा रखें। भिगे हुए चने कपड़े पर फैला लें। इसी प्रकार के दुसरे कपड़े से ढ़क दें। अगर कपड़ा बड़ा है तो उसी कपड़े से ढ़क लें। बर्तन को सूखी गहरे रंग कि जगह पर रखें। आपके रसोई का कपबोर्ड सबसे उयुक्त जगह है। 12 घंटे के बाद, कपड़े पर थोड़ा पानी छिड़के। चने से अंकुर निकलने के बाद, निकालके ज़रुरत अनुसार प्रयोग करें।

चुनने का सुझाव
• काबुली चना एक बहु उपयोगी सामग्री है जो प्रोटीन का बेहतरीन स्तोत्र है। इसलिये हमेशा थोड़ी मात्रा मे बनाकर रखें।
• काबुली चने साल भर कॅन्ड या सूखे रुप मे मिलते है।
• कॅन्ड काबुली चने को 5 साल तक रखा जा सकता है, और सूखे काबुली चने को हवा बंद डब्बे मे रखकर रखा जा सकता है।
• पकाने के बाद, काबुली चने को ढ़ककर फ्रिज मे कुछ दिनो तक रखा जा सकता है।

रसोई मे उपयोग
• भोगोये या पके हुए काबुली चने किसी भी व्यंजन के लिये बेहद स्वादिष्ट और पौष्टिक होते है।
• पके और मसले हुए काबुली चने को गोल आकार मे बनाकर फलाफल मे तला जा सकता है, तेल और मसालों के साथ मिलाकर हुमुस बनाया जा सकता है या इसका घोल बनाया जा सकता है और विभिन्न प्रकार के व्यंजन मे बेक कर सकते है।
• संपूर्ण पके हुए काबुली चने को सलाद, सूप और स्ट्यू मे मिलाया जा सकता है।
• काबुली चने मे चम्मच भर दही मिलाकर इसके प्रोटीन कि मात्रा बढ़ायें।
• भिगोये और अंकुरित काबुली चनों को सलाद मे मिलाया जा सकता है।
• ब्रैड के साथ यह बेहतरीन व्यंजन बनाता है।
• आप अपने सूप मे कुछ पके हुए काबुली चने मिला सकते है।
• उबालकर पके हुए चावल मे मिलाकर अपनी पसंद के मसालों के साथ मिलाकर स्वादिष्ट संपूर्ण आहार बनायें।
• ज़ीरा, टमाटर, लहसन, मिर्च और अदरक मिालयें। अंत में थोड़ा गरम मसाला और दही या नींबू का रस मिलाकर स्वादिष्ट सब्ज़ी बनायें।

संग्रह करने के तरीके
• सूखे बीन्स को हमेशा समान्य तापमान मे सूखे बर्तन मे रखें।
• सूखे बीन्स को फ्रिज मे ना रखें।
• पकाने के बाद, बीन्स को ढ़ककर फ्रिज मे लगभग 5 दिनो तक रखा जा सकता है और हवा बंद डब्बे मे रखकर 6 महीनों तह फ्रीज़र मे रखा जा सकता है।
• बीन्स का प्रयोग सालभर के अंदर करना चाहिए। इसके बाद यह अपनी नमी खो देते है जिससे इन्हे भिगोने और पकाने मे ज़्यादा समय लगता है।
• बीन्स को पकाने से पहले हमेशा छानकर किसी बी प्रकार के पत्थर या कंकड़ को हाथों से निकाल लें।

स्वास्थ्य विषयक
• काबुली चने ज़िन्क, फोलेट और प्रोटीन का अच्छा स्तोत्र है।
• इनमे रेशांक कि मात्रा भी ज्यादा होती है और इसलिये यह पौष्टिक माने जाते है, खासतौर पर मधुमेह से पीड़ीत व्यक्ति के लिये।
• काबुली चना मे वसा कि मात्रा कम होती है जिसमे से अधिक्तर पौलिअनसैच्यूरेटड वसा होता है।
• यह प्राकृतिक रुप से प्रोटीन से भरपूर होते है जो मज़बूत माँसपेशी और शरीर के लिये लाभदायक होता है।
• यह पचाने मे आसान नही होते और इससे गैस हो सकती है। इसलिये ठंड के मौसम मे इसे ना खायें। इसके भारीपन कि वजह से इसका सेवन बच्चे और वृद्ध को कर गैस कि तकलीफ हो सकती है।

कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स of काबुली चने
काबुली चने का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 28 होता है, जो कम गिना जाता है। ग्लाइसेमिक इंडेक्स का मतलब आपके रोज़ के खाने में पाए जाने वाला कार्बोहाइड्रेट युक्त पदार्थ आपके रक्त शर्करा या ग्लूकोज़ के स्तर को कितनी तेज़ी से बढता है उसका क्रम होता है। 0 से 50 तक के खाद्य पदार्थ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, 51 से 69 तक के खाद्य पदार्थ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स मध्यम होता है और 70 से 100 तक का ग्लाइसेमिक इंडेक्स उच्च माना जाता है। उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले पदार्थ वजन घटाने और मधुमेह के लिए उपयुक्त नहीं होते। काबुली चने जैसे खाद्य पदार्थ जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है और यह धीरे–धीरे अवशोषित होते हैं, इसलिए यह पदार्थ रक्त शर्करा को तुरंत बढ़ने नहीं देते। ऐसे पदार्थ वजन घटाने के लिए और मधुमेह के लिए उपयुक्त होते हैं।

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