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 Last Updated : Jul 18,2017


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7 recipes

Deep Fry Desserts - Read In English
તળીને બનતી મીઠાઈ રેસિપિ - ગુજરાતી માં વાંચો (Deep Fry Desserts recipes in Gujarati)


गौंट खाने योग्य गौंद होता है, जिसे पेड़ के तने से निकाला जाता है। गौंद के हल्के भूरे पीले रंग के दाने बाज़ार में आसनी से मिलते हैं। आपको इन कणों को तलकर फूलाना होता है और पाउडर बनाकर व्यंजन अनुसार प्रयोग कर सकते हैं। गौंद गरमाहट प्रदान करता है जिसे राजस्थान में ठंड के मौसम मे बहुत ज़्यादा पसंद किया ....
आपने आज तक गुलाब जामुन या आइसक्रीम के साथ गाज़र के हलवे का मज़ा लिया होगा। हालांकि, यह थाई स्टाल बनाना एक ताज़गी भरा और बहुत ही अनोखा व्यंजन है। आपने इससे पहले ऐसा अनोखा व्यंजन कभी नहीं खाया होगा क्योंकि केले के फ्रिटर्स्, जो इस नुस्खे का आधार रूप हैं वह तिल मिलाकर बनाए गए सुगंधीदार घोल से बनाए गए ....
यह एक पांरपारिक हैदराबादी व्यंजन है जो आम तौर पर शादियों और अन्य समारोहों में परोसा जाता है। यह अनोखी खीर लौकी से बनाई गई है लेकिन इसे चखने के बाद आपको इस बात का अनुमान भी नहीं होगा। दूध और मावे से पकाने के बाद उपर से सूके मेवे से सजाने ....
ठंड के दिनों में आटे के मालपुवे से ज़्यादा और कुछ पसंद नहीं आ सकता है। यह जानकर नया नहीं लगेगे कि यह राजस्थानी घरों का पारंरपरिक पसंदिदा है, खासतौर पर ठंड के दिनों मे। घी में तले हुए, मीठे, तीखे गेहूं के घोल की खुशबु, खासतौर पर सौंफ और कालीमिर्च की खुशबु आपके मूँह में पानी लाने के लिए काफी है! पर्या ....
अपने आप को ताज़ी, तली हुई गरमा गरम केसर से सजी जलेबी खाने से कौन रोक सकता है? आप सभी जलेबी पसंद करने वालों के लिए, यहाँ एक झट-पट और आसान सा विकल्प दिया गया है, जिसे बिना लंबे समय तक खमीर आने का इंतज़ार किये बिना बनाया जा सकता है।
ताज़े पनीर से बने मुलायम और नाज़ूक मालपुवे, जो आपके मूँह में जाते ही घुल जाऐंगे। यह व्यंजन काफी कुछ अजमेर के पास पुश्कर के मलाई मालपुवे जैसा है। इन्हें रबड़ी के साथ या केवल कटे हुए बादाम और पिस्ता से सजाकर गुनगुने तापमान पर परोसें। आपको छेना मालपुवे राजस्थान के केवल कुछ ही भाग में मिलेंगे। बस इन्हे ....
जोधपुर अपने मावा कचौड़ी के लिए मधहुर है। सूखे मेवे और मावा (खोया) से भरी, करारी तली हुई कचौड़ी को चाश्नी से ढ़का गया है। इन कचौड़ीयों का मज़ा दिन के किसी भी समय लिया जा सकता है। इन मीटी कचौड़ी को अकसर "गुजीया" कहा जाता है और होली के पर्व में इन्हें "खास तौर" पर बनाया जाता है।

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