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 Last Updated : Apr 06,2020


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Rajasthani Food - Read In English
રાજસ્થાની વ્યંજન - ગુજરાતી માં વાંચો (Rajasthani Food recipes in Gujarati)

राजस्थानी रेसिपी | राजस्थानी व्यंजन | राजस्थानी खाना | Rajasthani recipes in hindi |

राजस्थानी रेसिपी | राजस्थानी व्यंजन | राजस्थानी खाना | Rajasthani recipes in hindi |

शायद क्षेत्र की शाही विरासत के कारण, या क्षेत्र की चरम जलवायु और दुर्लभ वनस्पतियों द्वारा लाई गई डिशेशकीअनूठी विशेषताओं के कारण, राजस्थानी डिशेशअन्य सभी व्यंजनों से काफी अलग है और बहुत ही आकर्षक भी है! राजस्थानी भोजन आमतौर पर मसालेदार होता है और इसमें घी का उपयोग किया जाता है, जिसके बिना कोई भी डिशपूरी नहीं होती है।

 

दाल-बाटी-चूरमा और पंचमेल की सब्ज़ी, गेहूँ की बीकानेरी खिचड़ी और मंगोड़ी की दाल जैसे अन्य विशेष डिशपूरे देश मेंलोकप्रिय हैं और यह खंड आपको अपने भोजन में राजस्थान के भोजन को बनाने का तरीका बताता है।

राजस्थानी रेसीपी जैसे राजस्थानी सब्ज़ियों और लोकप्रिय अचार के साथ राजस्थानी व्यंजनों के हमारे चयन का आनंदलें। कुछ अद्भुत राजस्थानी मीठे और राजस्थानी नाश्ते के साथ अपने भोजन को और स्वादिष्टबनाए।

राजस्थानी संयोजन में मीठे और नमकीन डिश परोसते हैं जो दिल लुभाते हैं और स्वाद खुश करते हैं। दाल बाटी चूरमाथ्री-इन-वन ट्रीट, स्वीट डिश चूरमा, मसालेदार दाल और डीप-फ्राइड बाटी का एक पारंपरिक संयोजन है और ठंड केमौसम में खुद को गर्म रखनेका एक शानदार तरीका है!

 

राजस्थानी भोजन पानी की कमी के लिए अनुकूल है ( Rajasthani food adapts to a water shortage, article in hindi)

जलवायु परिस्थितियों के कारण, पानी की कमी होती है, जिसके परिणामस्वरूप ताजी सब्जियों की कमी होती है, उपलब्ध सब्जियां अक्सर दाल, दाल और सूखे / संरक्षित खाद्य पदार्थ जैसे पापड़ और वाडी के साथ संयुक्त होती हैं।इसके अलावा, दूध और छाछ जैसे डेयरी उत्पादों के साथ पानी प्रतिस्थापित किया जाता है। चने के आटे के साथ बेसन केपकौड़े कोछोटे काटके उबाला जाता है, बेसन के टुकड़ों को दही में आधारित ग्रेवी में पकाया जाता है ताकि गट्टेकीसब्ज़ी बनाई जा सके जो चावल और पराठों दोनों के साथ परोसी जासके। 

पापड़ की सब्ज़ी, मूंग दाल मंगोड़ी औरपापड़ के साथ पापड़ मंगोड़ी की सब्जी बनाने के लिए कुछ अन्य स्वादिष्ट राजस्थानी सब्ज़ियाँ हैं। इसके अलावा, अन्यराजस्थानी व्यंजन जैसे केर संगरियागवरफली की सब्ज़ीभरवा लौकी पर अपने हाथ आज़माएँ।

राजस्थानी खाना, दाल, कढ़ी रेसिपी (Rajasthani dal and kadhi recipes in hindi)

अपने भोजन को पौष्टिक दाल / कढ़ी के साथ पूरक करें । पकोड़ा कढ़ी या पिठोर कढ़ी जैसी राजस्थानी रेसिपीजायकेदार, अट्रैक्टिव संगत हैं जिन्हें आप जरूर ट्राई करें। 

इसके अलावा, दाल बंजारी, मुली मूंग दाल या पालक टोवरदाल जैसे घी और प्रामाणिक राजस्थानी फ्लेवर वाली तड़के वाली दाल स्वादिष्ट हैं। अपने नियमित दाल को बदलें।

 

राजस्थानी फूड, स्नैक्स ( Rajasthani food, snacks in hindi)

जब हम स्नैक्स के बारे में बात करते हैं, तो राजस्थान की कचौरी प्रसिद्ध है। ज्यादातर 'नमकीन' दुकानों पर मिलने वालीकचौरी की अंतहीन किस्में दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। 

प्याजकचौरी, शाही राज कचौरी, मटर की कचौरी कुछ लोकप्रियकचौरी हैं।

 

राजस्थानी रेसिपी, मिठाई ( Rajasthani recipes, Sweets in hindi )

राजस्थानियों ने अपने मठाई में पूर्ण-वसा वाले दूध और घी काउपयोग करके बनाई जाती है। कोई आश्चर्य नहीं किराजस्थान के मीठे व्यंजन इतने स्वर्गीय हैं! दिलकश कचोरियों के अलावा, आपको मावा कचोरियों जैसी मीठी किस्में भीमिल सकती हैं, जो खोये और सूखे मेवे, डिपफ्राई करकेऔर चीनी की चाशनी में डुबोकर तैयार की जाती हैं। 

मलाईघेवर, एक छत्ते के आकार की नाजुकता जो सादे आटे और घी का उपयोग करके बनाई जाती है, शुभ अवसरों औरत्योहारों पर बनाई जाने वाली एक मिठाई है।

लोग रसोई में इकट्ठा होते हैं, ताकी घरेलू रोटियों का आनंद ले सके । गेहूँ के आटे की रोटियाँ, परांठे, मसाला बाटीउदारता से घी के साथ बनाए जाते हैं। इस क्षेत्र में सर्दियाँ कठोर होती हैं, गर्म खिचड़ी, गौंड के लड्डू, मूंग की दाल काहलवा, बादाम का हलवा कुछ सर्दियों की रात में शरीर को गर्म रखने के लिए खाए जाने वाले कुछ शाकाहारी व्यंजन हैं!

 

 

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बाजरा रोटी | बाजरे की रोटी | राजस्थानी बाजरे की रोटी | बाजरा रोटी | bajra roti recipe in hindi | with 16 amazing images. हालांकि बाजरा रोटी राजस्थान के कुछ ही हिस्सों में कि जाती है, बाजरे की रोटी को संपूर्ण क्षेत्र में पसंद किया जाता है। गाँव में इन मोटे बेले हुए बाजरे की रोटी को कन्डे (गोबर के कंडे) पर पकाया जाता है। यह इन्हें बनाने का पारंपरिक तरीका है क्योंकि यह इन रोटीयों को जला हुआ स्वाद प्रदान करता है। लेकिन, यह इन बाजरे की रोटी को तवे में पकाया हुआ विकल्प है। राजस्थानी भोजन मे, बाजरे की रोटी को लगभग किसी भी प्रकार की कढ़ी या सब्ज़ी के साथ परोसा जा सकता है। वहाँ के लोगों का मुख्य आहार बाजरे की रोटी, लहसुन की चटनी और प्याज़ का मेल होता है। हालांकि इन्हें बनाना बेहद आसान है, यह बेहद स्वादिष्ट लगते हैं! नीचे दिया गया है बाजरा रोटी | बाजरे की रोटी | राजस्थानी बाजरे की रोटी | बाजरा रोटी | bajra roti recipe in hindi | स्टेप बाय स्टेप फोटो और वीडियो के साथ।
शिमला मिर्च के टुकड़ो से बनी और कलौंजी, सौंफ, हरी मिर्च और आम मसालों के स्वाद से भरपुर यह एक चटपटी लौंजी है, जिसे आप बनाकर तुरंत परोस सकते हैं या कुछ दिनों के लिए रख भी सकते हैं। शिमला मिर्च की लौंजी को अमचूर से मज़ेदार खट्टापन मिलता है, जिसे थोड़ी शक्कर से और भी मज़ेदार बनाया गया है। बनाने में बेहद आसान, आप जब चाहें इस लौंजी को बनाकर इसका मज़ा ले सकते हैं।
मेथी की लौंजी के एक चम्मच को अपने मूँह में रखें और आपको सभी प्रकार के स्वाद का अनुभव होगा- कड़वा, मीठा और तीखा! आपको इस पारंपरिक व्यंजन में स्वाद का संतुलित मेल ज़रुर पसंद आएगा, जहाँ भिगोए हुए मेथी दानों को मसाले और पाउडर के साथ मिलाकर बनाया गया है और साथ ही गुड़ और किसमिश जैसी सामग्री से मीठापन प्रदान किया गया है। जहाँ इस व्यंजन मे भिगोए हुए मेथी दानों का प्रयोग किया गया है, आप इसमें अंकुरित मेथी दानों का प्रयोग भी कर सकते हैं, जो इस लौंजी को कम कड़वा बनाते हैं। आप इस मेथी की लौंजी को रोटी, खाखरे या यहाँ तक चावल के साथ भी परोस सकते हैं, हालांकि राजस्थानी इसका मज़ा गरमा गरम पुरी या पराठों के साथ लेते हैं।
झटपट और आसानी से बनने वाला अचार जो आपको ज़रुर पसंद आएगा! आम की लौंजी को चुनिंदा मसाले और पाउडर के साथ आम को पकाकर बनाया जाता है। इसे बनाने में ना कोई झंझट, सक्रीय नापतोल और समय लगता है, लेकिन फिर भी इसे आप लगभग 4 दिनों तक फ्रिज मे ताज़ा रख सकते हैं। इस खट्टी-मीठी आम की लौंजी को आप अपने पसंद के पराठे या रोटी के साथ परोस सकते हैं।
लाल मिर्च पाउडर के प्रयोग से एक तीखी बनी हुई और नींबू के रस से चटपटी बनी लहसुन की चटनी। लहसुन की चटनी बाजरा रोटला जैसे सादे और आसानी से बनने वाले व्यंजन के साथ बेहद अच्छी लगती है। इसका प्रयोग सेन्डविच, ब्रेड या अन्य नमकीन व्यंजन को चटपटा बनाने के लिए भी किया जा सकता है। हवा बद डब्बे में डालकर फ्रिज में रखने के बाद, इस चटनी को लगभग 2 हफ्तों के लिए ताज़ा रखा जा सकता है।
केर, राजस्थान में खास पायी जाने वाली बेरी का प्रयोग इस श्रेत्र में बहुत से मज़ेदार तरीकों से किया जाता है। केर का अचार ऐसा ही स्वादिष्ट व्यंजन है, जिसमें केर को सरसों के तेल में, विभिन्न प्रकार के मसाले और बीज साथ अचार के रुप में बनाया जाता है, इसलिए इस अवार की खुशबु ही आपकी भूख बढ़ाने के लिए काफी है।
सूप से लेकर अचार तक, हर व्यंजन को ठीक किया जा सकता है। लेकिन कभी-कभी लंबे समय लगने वाले व्यंजन भी बेहद स्वादिष्ट लगते हैँ। आपको यह सच तब लगेगा, जब सात दिनों तक इंतज़ार करने के बाद, आप इस स्वादिष्ट आम और चने के अचार का मज़ा लेंगे। कच्ची कैरी और सफेद काबुली चने से बना एक पारंपरिक राजस्थानी अचार, जिसे बहुत से मसालों से स्वादिष्ट बनाया गया है और सरसों के तेल में सचगह्र किया गया है, इस अचार में खट्टे से लेकर तीखे स्वाद का मेल है। अचार को सग्रह करने से पहले, बर्तन को अच्छी तरह साफ करना ना भुलें, जिससे इसे लंबे समय तक रखा जा सके।
रोज़ प्रोयग होने वाली सामग्री, कम समय और बहुत ही कम मेहनत, इस स्वादिष्ट और मूँह में पानी लाने वाली चटनी बनाने के लिए केवल इनकी ज़रुरत है! बीज का आम तड़का और आम मसाले पाउडर का प्रयोग, सौम्य टमाटर को एक शानदार व्यंजन में बदलते हैं। देखा गया तो, सामग्री का पर्याप्त मेल और झटपट बनाने का तरीका, टमाटर के खट्टेपन को इस व्यंजन में बेहतरीन तरह से बनाए रखते हैं। इस टमाटर की लौंजी को अपने पसंद की रोटी के साथ गरमा गरम और ताज़ा परोसें।
मूंग दाल कचौड़ी रेसिपी | राजस्थानी खस्ता कचौड़ी | दाल भरी खस्ता कचौरी | moong dal kachori recipe in hindi language | with 28 amazing images. मूंग दाल की कचौड़ी एक लिप-स्मूचिंग डिश है, जो सीधे राजस्थान के जायके से बनती है और जिसे राजस्थानी खस्ता कचौड़ी या दाल भरी खस्ता कचौरी भी कहा जाता है। राजस्थानी खस्ता कचौड़ी एक बहुत ही स्वादिष्ट स्नैक है, जो उत्तर भारत में बहुत लोकप्रिय है और सबसे पसंदीदा स्ट्रीट फूड में से एक है। एक मज़ेदार कचौड़ी वह होती है जो बाहर से फूली हुई और करारी हो और अंदर से खोखली जहाँ इसका भरवां मिश्रण किनारों पर चिपका हुआ हो। यह व्यंजन विधी अपनी रसोई में मज़ेदार राजस्थानी खस्ता कचौड़ी बनाने की है। स्वाद से भरी मूंग दाल के भरवां मिश्रण से भरी, इस मूंग दाल कचौड़ी को समय लेकर धिमी आँच पर तला गया है जिससे बाहर कि परत करारी और खोखली बनती है और अंदर का भाग पुरी तरह से पक जाता है। इस राजस्थानी खस्ता कचौड़ी को हवा बंद डब्बे में 2 से 3 दिनों के लिए रखा जा सकता है। परोसने से तुरंत पहले कचौड़ी को अवन में 7 से 10 मिनट के लिए गरम कर लें और दही और चटनीयों के साथ परोसें! नीचे दिया गया है मूंग दाल कचौड़ी रेसिपी | राजस्थानी खस्ता कचौड़ी | दाल भरी खस्ता कचौरी | moong dal kachori recipe in hindi language | स्टेप बाय स्टेप फोटो और वीडियो के साथ।
जोधपुर अपने मावा कचौड़ी के लिए मधहुर है। सूखे मेवे और मावा (खोया) से भरी, करारी तली हुई कचौड़ी को चाश्नी से ढ़का गया है। इन कचौड़ीयों का मज़ा दिन के किसी भी समय लिया जा सकता है। इन मीटी कचौड़ी को अकसर "गुजीया" कहा जाता है और होली के पर्व में इन्हें "खास तौर" पर बनाया जाता है।

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